A cruel fairytale - Chapter 8
A Cruel Fairytaleआरोही से सच पता लगाने के लिए रिदांश ने उसे शराब पिलाई थी। नशे में जब आरोही उसके करीब आई तो एक पल के लिए रिदांश सब कुछ भूल गया और उसकी खूबसूरती में खो गया। लड़कियां उसकी कमजोरी नहीं थी पर ऐसा भी नहीं था कि रिदांश इतना करीब आने के बाद किसी को छोड़ दे। वो आरोही को बेड पर लेकर गया और सब कुछ भूल कर उसके साथ फिजिकली इंवॉल्वड हो गया।
आरोही भले ही नशे में हो पर वो अपनी सच्चाई नहीं भूली थी। आरोही को अच्छे से याद था कि वो नॉवेल में फंस गई है और उसे वो सीन भी याद आने लगा, जब उसने इसी तरह का कुछ अपने नॉवेल में भी लिखा था। बस फर्क इतना था नॉवेल में लिखे सीन में आरोही नशे में नहीं थी और अब इस वक्त वो नशे में थी।
रात के किस पहर में रिदांश ने आरोही को छोड़ा, वो उसे खुद भी एहसास नहीं था। थकावट के मारे उसे नींद आ गई थी। अगली सुबह आरोही की नींद टूटी तो उसे अपने ऊपर कुछ भारी सा महसूस हुआ। हैंगओवर होने की वजह से उसके सिर में भयंकर दर्द हो रहा था।
आरोही ने अपना सिर पकड़कर बंद आंखों से कहा, “मैं... मैं कहां हूं? मैं कोई सपना देख रही हूं क्या?” नॉवेल में आने के बाद ये पहली रात थी... जब उसने नींद ली थी। दिन काफी लंबा था, एक रेगुलर दिन से भी ज्यादा लंबा महसूस हो रहा था।
आरोही ने आंखें खोली तो अपने ऊपर रिदांश को देखकर वो समझ गई कि वो कोई सपना नहीं देख रही है और उसके ऊपर कोई भारी बोझ नहीं रखा हुआ, बल्कि वो तो रिदांश के शरीर का वजन था, जो पूरा उसके ऊपर आया हुआ था। उसने कुछ नही पहना था।
रिदांश को अपने ऊपर देखकर आरोही की आंखें नम होने लगी। उसने रिदांश को जगाने के लिए कहा, “तुम... तुम जो चाहते थे, वो तुम्हें मिल गया है। अब मेरे ऊपर से उठो।”
रिदांश ने बंद आंखों से ही कहा, “क्यों? तुम्हें कोई प्रॉब्लम हो रही है? मुझे लगा तुम्हें ट्रेनिंग में ये बताया गया होगा कि तुम्हारे साथ कुछ भी हो सकता है। ये सब तो बहुत नॉर्मल है। शुक्र मनाओ यहां बेड पर सिर्फ मैं अकेला हूं वरना जैसी तुम्हारी हरकतें हैं...”
रिदांश की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि आरोही उसे बीच में काटते हुए बोली, “जो भी सोचा है वो अपने मन में ही रखो। मुझे वॉशरूम जाना है। प्लीज मेरे ऊपर से खड़े हो जाओ।”
“मैं तो खड़ा हो जाऊंगा लेकिन कल रात के बाद तुम चलने लायक नहीं बची हो।” रिदांश ने आरोही के ऊपर से उठते हुए कहा।
आरोही ने उसकी बात की तरफ ध्यान नहीं दिया। जब रिदांश उसके ऊपर से उठा और आरोही वॉशरूम जाने के लिए उठने लगी तो उसकी बॉडी में उसे भयंकर दर्द महसूस हुआ। ऊपर से उसने कुछ पहन भी नहीं रखा था। उसकी ये हालत देखकर रिदांश के फेस पर इविल स्माइल थी तो वही आरोही उसे गुस्से में देख रही थी।
रिदांश ने आरोही को अपनी बाहों में खींचते हुए कहा, “वैसे मानना पड़ेगा, भगवान ने तुम्हें काफी फुर्सत से बनाया है। मैं तुमसे ज्यादा खूबसूरत लड़की से नहीं मिला। वैसे तुमने कहा कि हम किसी नॉवेल में है और जो कि तुमने लिखी है, तो तुमने जानबूझकर खुद को इतना खूबसूरत बनाया है क्या? अगर तुमने ये नॉवेल लिखी है, तो तुम एक बुरी राइटर हो। अपने साथ इतना बुरा कौन लिखता है?” रिदांश ने उसका मजाक बनाते हुए कहा।
आरोही ने उसे तिरछी निगाहों से देखा। “अब तो मुझे भी अफसोस हो रहा है कि मैंने वो नॉर्मल लिखी ही क्यों? मुझे उसे फाड़ कर फेंक देना चाहिए था।” आरोही ने गुस्से में बड़बड़ा कर कहा।
“लिखना आसान होता है, झेलना मुश्किल। सोचो एक राइटर, जिसकी कमाल की फैंटेसीज है। डार्क रोमांस लिखा होगा ना तुमने? आगे चलकर मुझे तुमसे प्यार तो नही हो जाएगा ना? या तुम्हे मुझसे।” रिदांश बार बार उसका मजाक बना रहा था।
इस बार आरोही ने उसकी बार का कोई जवाब नही दिया। वो रिदांश को खुद से दूर करने की कोशिश कर रही थी लेकिन रिदांश ने उसे काफी टाइटली पकड़ रखा था तो आरोही चाहकर भी उसे खुद से अलग नहीं कर पा रही थी। आरोही कोई बॉडीबिल्डर या डिफेंस आर्ट सीखने वाली रफ टफ लड़की नहीं थी। उसने अपना ज्यादातर टाइम राइटिंग की वजह से एक बंद कमरे में बिताया था इसलिए वो काफी डेलिकेट थी।
रिदांश ने एक नजर आरोही की बॉडी की तरफ देखा तो उसके बॉडी पर रिदांश के दिए हिकीज के निशान बने हुए थे। रिदांश ने उसकी गर्दन पर उंगलियां घूमाते हुए कहा, “वैसे काफी गलत लड़की को चुना है उन्होंने अपने मिशन के लिए।”
“तुम्हें कितनी बार बताऊं कि मैं किसी मिशन के लिए नहीं आई हूं। तुम्हें मेरी बात पर यकीन करना है तो करो, वरना मुझे इससे कोई लेना देना नहीं है। फिलहाल के लिए मुझे छोड़ दो मुझे वॉशरूम जाना है।” आरोही ने नम आंखों से कहा।
रिदांश ने एक पल उसकी गहरी काली आंखों में देखा और फिर उसे छोड़ दिया। रिदांश ने उठकर टॉवल बांधा और आरोही के कपड़े उठने लगा। कल रात जल्दबाजी में उसने आरोही के कपड़े निकालने के चक्कर में उन्हें फाड़ दिया था।
आरोही के कपड़े नहीं होने की वजह से रिदांश ने उसे अपना शर्ट पहनाया और फिर अपनी बाहों में उठकर बाथरूम के अंदर छोड़ दिया। रिदांश फिर बाथरूम से बाहर आ गया था तो वही आरोही वॉशरूम में बैठी अपनी किस्मत पर रो रही थी।
“ये क्या हो गया मेरे साथ? जरूर उन लोगों की बददुआ मुझे लग गई। मैं खुश हो रही थी कि मुझे मेरी मां वापस मिल गई है। जो वक्त मैं उनके साथ नहीं बिता पाई थी वो अब बिताऊंगी लेकिन यहां तो सब उल्टा हो गया। तो... तो क्या मैं नॉवेल में लिखी चीजों को नहीं बदल सकती? अगर नहीं बदल सकती तो मुझे... मुझे मरना होगा क्या?” बोलते हुए आरोही की आंखें हैरानी से बड़ी हो गई। आखिर उसी ने वो सब लिखा था।
नॉवेल के लास्ट कुछ चैप्टर पहले आरोही की मौत हो गई थी। अपनी मौत के बारे में सोचकर ही आरोही कांप गई।
आरोही अपने ख्यालों में खोई हुई थी तभी उसे दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनाई दी। रिदांश बाथरूम के बाहर था। उसने दरवाजा खटखटाते हुए कहा, “आधे घंटे से अंदर हो तुम? बाहर आ रही हो या मैं अंदर आऊं? जल्दी करो आखिर तुम्हें एक स्पेशल जगह लेकर जाना है।”
रिदांश की आवाज से आरोही समझ गई कि वो स्पेशल जगह जरूर उसके लिए नर्क से कम नहीं होने वाली और आरोही याद करने की कोशिश कर रही थी पर उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। उसके पास रिदांश से बचने का कोई रास्ता नहीं था। मजबूरन आरोही को बाहर आना ही पड़ा। वो धीमे कदमों से चलकर बाथरूम के बाहर आ गई थी।
रिदांश आरोही की हालत को देखा, तो तिरछा मुस्कुरा कर कहा, “इतनी डेलिकेट बॉडी को सिर्फ प्यार करने का मन करता है पर क्या कर सकते हैं। टॉर्चर तो सहना पड़ेगा डार्लिंग। बस मुझे थोड़ा टाइम दो, मैं अभी आया।”
आरोही को अपनी किस्मत पर अफसोस हो रहा था। सामने खड़ा रिदांश उसे टॉर्चर करने को कह रहा था और वो चुपचाप अपने साथ ही बुरा होने का इंतजार कर रही थी।
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