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Chapter 13

A cruel fairytale - Chapter 13

A Cruel Fairytale

रिदांश ने आरोही को साफ कह दिया था कि वो उसके बच्चे को पैदा करेगी, साथ ही उसे ये सब प्रोसेस नेचुरल रखनी है। कुछ भी करने से पहले रिदांश ने आरोही के चेहरे की तरफ देखा तो वो काफी थकी हुई और कमजोर लग रही थी। तब रिदांश को एहसास हुआ कि आरोही जब से उसके यहां आई है, उसने कुछ नहीं खाया था।

रिदांश आरोही के साथ डाइनिंग टेबल पर था और दोनों साथ में डिनर कर रहे थे। आरोही एक बार फिर रिदांश को ये यकीन दिलाने की कोशिश कर रही थी कि वो अपनी ही लिखी नॉवेल में फंस चुकी है। आरोही बचने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही थी। इस बार रिदांश के चेहरे के एक्सप्रेशंस थोड़े सीरियस थे। ऐसा लग रहा था जैसे उसे आरोही की बातों पर यकीन हो रहा हो।

रिदांश जब काफी देर तक बिना इंटरप्ट किए आरोही की बात सुनता रहा तो आरोही ने उसकी आंखों में देखकर मासूमियत से कहा, “प्लीज मेरा यकीन करो। तुम ये सब मत करो। ये रियल नहीं है, बस नॉवेल की एक स्टोरी है। मुझे मेरे घर तक वापस छोड़ आओ।” आरोही काफी रिक्वेस्टिंग तरीके से बात कर रही थी।

रिदांश कुछ देर तक बिल्कुल चुप रहा। फिर उसने आरोही के बालों को अपनी मुट्ठी में भरा और उसे अपने करीब लाकर उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “नॉवेल हो या मूवी आई डोंट गिव ए डेम.... अगर नॉवेल ही है तो इतना फील मत करो। मेरे लिए रियलिटी है और मैं अपनी प्रॉपर्टी को जाने नहीं दे सकता। चुपचाप खाना खत्म करो, बेडरूम में भी जाना है।”

रिदांश के बाल खींचने पर आरोही की आंखों में आंसू थे। उसकी भूख तो जैसे मर गई हो। आरोही ने आधा ही खाना खत्म किया था और फिर खाते हुए रुक गई। रिदांश समझ गया था कि आरोही आगे कुछ नहीं खायेगी तो उसने आरोही का हाथ पकड़ा और उसे अपने कमरे में घसीट कर ले जाने लगा। आरोही चिल्लाते हुए उसे रोकने की कोशिश कर रही थी।

“प्लीज... प्लीज मेरे साथ ये मत करो। मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं... ये ... ये बहुत पेनफुल है। आई कांट टॉलरेट दिस। प्लीज रिदांश... प्लीज तुम चाहते हो मैं तुम्हारा बच्चा पैदा करूं तो तुम आर्टिफिशियल प्रोसेस रख सकते हो। आई स्वेयर मैं उफ्फ तक नहीं करुंगी। ये बहुत पेनफुल है... प्लीज मत करो।” आरोही गिड़गिड़ाते हुए रिदांश को मनाने की कोशिश कर रही थी पर वो उसकी कहां सुनने वाला था। उसे ना तो आरोही के दर्द से फर्क पड़ता था और ना ही उसकी सुनाई कहानी से।

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बेडरूम में आते ही रिदांश ने आरोही का हाथ छोड़ा और फिर उसकी तरफ ऊपर से नीचे देखा। उसके इस तरह इंटेंसिटी से देखने पर आरोही अनकंफर्टेबल होने लगी। उसकी नज़रें ही काफी थी, जो उसे बिना छुए ही अंदर तक चीर रही थी।

रिदांश ने उसे देख कर गहरी सांस लेकर छोड़ी और कहा, “जाकर अभी नहा कर आओ और 10 मिनट से ज्यादा टाइम नहीं लगना चाहिए। अगर 1 मिनट भी एक्स्ट्रा लिया तो मैं बाथरूम में आ जाऊंगा और वहीं पर शुरू हो जाऊंगा एंड आई स्वेयर मुझे ऐसा करते हुए एक परसेंट भी हिचकिचाहट नहीं होगी।”

आरोही अपनी जगह पर बुत बनी हुई खड़ी हुई थी मानो उसे रिदांश की बात सुनाई ही ना दी हो। रिदांश का पेशेंस लेवल अब खत्म हो रहा था। उसने आरोही का हाथ पकड़ कर उसे खींचते हुए कहा, “लगता है हमारी मिस राइटर को प्यार की लैंग्वेज समझ नहीं आती है। अगर ऐसा है तो यही सही।”

रिदांश आरोही को बाथरूम में लेकर आ गया था। उसने शावर ऑन किया। आरोही ने अभी भी रिदांश की शर्ट पहनी हुई थी, जो पानी गिरने से पूरी तरह उसकी बॉडी से चिपक गई थी। शर्ट वाइट होने की वजह से ट्रांसपेरेंट हो गई थी और उसमें आरोही की बॉडी एकदम क्लीयरली विजिबल थी।

आरोही रोए जा रही थी लेकिन पानी में उसके आंसुओ का कुछ पता नहीं चल रहा था। रिदांश उसके करीब आया और फिर उसकी शर्ट खोलकर फेंक दी। वो खुद अपने हाथों से उसकी बॉडी क्लीन कर रहा था। उसका इस तरह आरोही की बॉडी के हर एक हिस्से को छूना उसे काफी असहज कर रहा था।

आरोही खुद में सिमटने लगी तो रिदांश ने धीमी लेकिन सर्द आवाज में कहा, “चुपचाप सीधी खड़ी रहो। काफी नॉर्मली टच कर रहा हूं, उसी में तुम्हारा ये हाल है तो थोड़ी देर बाद में जो होगा, उसका क्या?”

“प्लीज....” आरोही के मुंह से इतना ही निकला था। अब तो उसकी इतनी भी हिम्मत नहीं बची थी कि वो रिदांश से अपने दिल की बात कह सके।

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रिदांश ने हर बार की तरह आरोही को इग्नोर किया और फिर उसे नहलाने के बाद टॉवल में रेप करके बाहर लेकर आ गया। रिदांश आरोही को ऐसे एडोर कर रहा था, जैसे वो कोई छोटी बच्ची हो। उसने उसके बाल सुखाए। कोई उन्हें इस तरह देखता तो उन्हें यही लगता कि रिदांश आरोही से बहुत प्यार करता है और उसकी काफी परवाह करता है लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल उलट थी। रिदांश के चेहरे पर कोई भाव नहीं था जबकि आरोही की आंखें रो-रो कर लाल हो चुकी थी।

आरोही के बाल सुखाने के बाद रिदांश ने उसका टॉवल खींचा और फिर से बेड पर धकेल दिया। अगले ही पल रिदांश उसके ऊपर था।

कुछ भी करने से पहले रिदांश ने आरोही की आंखों में देखकर सख्त लहजे में कहा, “तुम्हारे पास बचने का कोई रास्ता नहीं है। बेटर है कॉर्पोरेट करो। जितनी जल्दी तुम प्रेग्नेंट होगी, उतनी जल्दी तुम्हारे साथ ये सब होना बंद हो जाएगा। वरना हर रात तुम्हें यही सब झेलना होगा और ट्रस्ट मी मुझे एक परसेंट भी गिल्ट नहीं होगा। इन फैक्ट आई विल एंजॉय।” इतना कहने के बाद रिदांश ने अपने होंठ आरोही के होठों पर रख दिए और उसे काफी ब्रूटल तरीके से किस कर रहा था।

ये पहली बार नहीं था कि रिदांश किसी के साथ बेड पर एग्रेसिव तरीके से बिहेव कर रहा था। आखिर आरोही ने उसके पर्सनेलिटी बनाई ही ऐसी थी, एक बेदिल इंसान, जिसे सिर्फ खुद के दर्द से फर्क पड़ता था।

रिदांश ने आरोही की पूरी बॉडी को किसेस और हिकिज से भर दिया था। आरोही एक लाश की तरह पड़ी हुई थी। कुछ ही देर में आरोही के मुंह से एक जोरदार चीख निकली, जो की देर रात तक सिसकियां के तौर पर उस कमरे में गूंज रही थी।

जब रिदांश थक गया तो वो आरोही के बगल में लेट गया मानो अब उसे आरोही से कोई मतलब ही ना रहा हो। थोड़ी देर में ही रिदांश को नींद आ गई थी जबकि आरोही की आंखों में नींद तो छोड़ो, वो ठीक से लेट भी नहीं पा रही थी। उसकी बॉडी में भयंकर दर्द हो रहा था। उसने गुस्से में रिदांश की तरफ देखा, जो बेफिक्र होकर सो रहा था।

रिदांश की तरफ देखकर आरोही ने धीरे से कहा, “कोई बात नहीं रिदांश ठाकुर, आज तुम मेरे साथ ये सब करके मुझे तकलीफ पहुंचा रहे हो, कल मुझसे ज्यादा तकलीफ तुम्हे होगा। मैंने तो तुम्हें पहले ही वॉर्न किया था। नॉवेल मैंने लिखा है। जितना दर्द मुझे मिला है, उसके कहीं ज्यादा दर्द तुम्हें मिलने वाला है।” बोलते हुए आरोही की आंखों से आंसू का कतरा बह गया था।

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