Under the mafia moon - Chapter 18
Under the mafia moonकृशा युग के विला के बेसमेंट में बने हॉस्पिटल में थी। पूरी रात बाहर रहने की वजह से कृशा की हालत काफी बिगड़ चुकी थी।
उसके रूम के बाहर शब्द और सारा डॉक्टर के बाहर निकलने का वेट कर रहे थे। उनसे कुछ दूरी पर युग बैठा था और अपने मोबाइल में गेम खेल रहा था। डॉक्टर को अंदर गए काफी टाइम हो चुका था।
लगभग डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर बाहर आया। उसे बाहर देखकर सारा और शब्द कृशा की अपडेट लेने के लिए उसकी तरफ बढ़े लेकिन डॉक्टर उनके पास रुकने के बजाय युग के पास गया।
डॉक्टर ने युग के पास जाकर कहा, “बॉडी टेंपेचर स्टेबल है। होश आने में टाइम लगेगा। फीवर रहेगा कुछ दिन... पर ठीक हो जाएगी।” उसने कम शब्दों में कृशा की पूरी हेल्थ रिपोर्ट दे दी।
युग ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया। उसने इशारे से डॉक्टर को जाने के लिए कहा। डॉक्टर के जाते ही युग सारा के पास जाकर बोला, “अब ठीक है वो।”
“सुना मैने..” सारा ने गुस्से में जवाब दिया। “तुमने तो कोई कमी नहीं रखी थी उसे मारने में।”
“पर किस्मत तो देखो... अब भी जिंदा है वो।” युग ने सारकास्टिक वे में कहा। “देखते है कब तक किस्मत साथ देती है।” बोलकर युग कृशा के रूम की तरफ बढ़ने को हुआ तभी सारा ने उसका हाथ पकड़ा और उसे रोक लिया।
सारा उस वक्त काफी गुस्से में थी। उसने चिल्ला कर कहा, “डोंट टेस्ट माय पैशेंस युग राणा। आई वॉर्न यू तुम कृशा के करीब भी नही आओगे।”
“तुम्हारी इस बदतमीजी की तुम्हे भी सजा मिल सकती है सो माइंड योर वर्ड्स सारा सिंघानिया।” युग ने सर्द लहजे में कहा।
“हां इसके अलावा तुम्हें और आता ही क्या है। दूसरों को सजा देना, उन्हें तकलीफ पहुंचाना। बहुत मजा आता है ना तुम्हें ये सब करके। सोचो, जो तुम कर रहे हो कभी कोई उनकी सजा देने पर आ गया ना युग राणा तो छुपने की जगह नहीं मिलेगी।” कृशा की मरने वाली हालत देखकर सारा का टेंपर बहुत हाई था और उसने गुस्से में युग को काफी कुछ बोल दिया था।
शब्द ने एक नजर युग की आंखों में देखा तो वो गुस्से से लाल थी। युग कुछ कहता उससे पहले शब्द बोल पड़ा, “तुम... तुम जाकर रेस्ट करो। हम यहां का देख लेंगे।”
युग ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चला गया। उसके जाते ही शब्द ने सारा से कहा, “तुम्हें उससे सोच समझ कर बात करनी चाहिए।”
“सीरियसली शब्द? तुम अभी भी उसका फेवर कर रहे हो। मुझे लगा था कि तुम उससे अलग हो लेकिन तुम्हारी बातों से लग रहा है कि तुम भी बिल्कुल उसी की तरह हो।” शब्द से बात करते हुए सारा की आंखें नम होने लगी थी।
शब्द ने उसे समझाते हुए कहा, “मैं उसके जैसा नहीं हूं लेकिन उसे अच्छे से जानता हूं। तुम्हारी कहीं एक-एक बात उसके गुस्से को बढ़ा रही थी और इन फ्यूचर उसकी सजा तुम्हें या कृशा को भुगतनी पड़ती।”
सारा ने उसकी बात पर हामी भरी। इतने दिनों में पहली बार वो खुद को अकेला और टूटा हुआ महसूस कर रही थी इसलिए उसने शब्द को हग कर लिया और भरी आवाज में कहा, “मुझे यहां से बाहर निकलना है शब्द। मैं सच में थक गई हूं इन सब से।”
शब्द ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया या यूं कहें उसके पास कोई जवाब था ही नहीं। वो अच्छे से जानता था युग की कैद से निकल पाना इतना आसान नहीं था। वो चुपचाप सारा को सहला रहा था।
वहीं दूसरी तरफ हॉस्पिटल में जो भी चल रहा था, उसे अपनी आईपैड स्क्रीन पर देख कर युग के फेस पर इविल स्माइल थी।
“इतने में ही थक गई तुम सारा सिंघानिया। अभी तो मैंने शुरूआत तक नहीं की है। एक छोटी सी पनिशमेंट, जिसमें तुम्हारी उस सो कॉल्ड सिस्टर को किसी ने हाथ तक नहीं लगाया उसे देखकर तुम इतना डर गई हो तो सोचो जिस दिन ये डेविल अपनी पर आया तो तुम्हारा और उसका क्या हाल होगा।” युग ने मुस्कुराते हुए खुद से कहा।
विला के बाथरूम को छोड़कर हर एक एरिया में कैमरा लगा हुआ था। युग ने फुटेज को हॉस्पिटल के वेटिंग एरिया से कृशा के रूम में स्किप किया तो उसने देखा कृशा के ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी और वो बेहोश थी।
“तुम्हें समझाया था कि मुझसे दूर रहो। अभी भी वॉर्न कर रहा हूं अगर सही सलामत वापस अपने घर पहुंचना है तो गलती से भी मेरे सामने मत आना। वैसे तुम हो कौन? सारा सिंघानिया को खुद से ज्यादा तुम्हारी फिक्र है और तुम्हें इस हालत में देखकर आज पहली बार मैंने उसकी आंखों में बेबसी महसूस की।” बोलते हुए युग ने अपना आईपैड साइड में रख दिया। उसे भी हैरानी हो रही थी कि ऐसा कौन सा रिश्ता था, जिसकी वजह से सारा कृशा की वजह से युग से इस कदर बदतमीजी कर गई।
कुछ पल सोचने के बाद युग ने मलिक को कॉल किया और कहा, “मुझे 15 मिनट के अंदर उस लड़की की पूरी डिटेल चाहिए, जो सारा सिंघानिया के साथ यहां आई है। मैं कॉफी के बाद तुम्हें मीटिंग रूम में मिलता हूं।”
“ओके सर।” मलिक ने सधे हुए लहजे में जवाब दिया और युग के बताए काम पर लग गया।
लगभग 15 मिनट बाद युग के कहें मुताबिक वो मलिक के साथ मीटिंग रूम में था। वहां आते ही युग चेयर पर बैठा और बैठते ही पूछा, “क्या पता चला है उसके बारे में?”
“जैसा कि आपको पता है सारा सिंघानिया के पेरेंट्स की डेथ उसकी कम उम्र में ही हो गई थी। आदित्य सिंघानिया माफिया वर्ल्ड में बिजी थे तो सारा सिंघानिया का पालन पोषण उनके घर पर काम कर रही एक औरत ने किया। वो सारा सिंघानिया की मां की छोटी बहन है, तो उसने उसे अपनी बेटी की तरह ही पाला है। उसका नाम अमृता चौधरी है, अनमैरिड है लेकिन फिर भी उसके एक बेटी है और वही बेटी कृशा है।” मलिक ने 15 मिनट में ही कृशा के बारे में काफी कुछ जानकारी हासिल कर ली थी।
पूरी बात सुनने के बाद युग कुछ पल चुप रहा और फिर कहा, “मतलब एक ऐसी लड़की जिसके बाप और खानदान का कोई पता नहीं है उसके लिए सारा सिंघानिया मुझसे लड़ रही है? बात इतनी मामूली तो नहीं हो सकती मलिक।”
“आपको बताया ना अमृता इसकी वजह है। उन्होंने सारा को अपनी बेटी की तरह पाला है या यूं कहे अपनी बेटी से बढ़कर... आगे अगर कृशा की पूरी लाइफ की बात करूं तो सारा की तरह उसकी भी इनिशियल स्कूलिंग घर पर ही हुई है। उसके बाद दोनों ने आगे की एजुकेशन कहां कंप्लीट की इसके बारे में सब कुछ कॉन्फिडेंशियल है। कृशा सिंघानिया पैलेस में नही रहती थी, बस कभी कभार आना जाना था उसका। कभी कभार से मेरा मतलब बहुत कम... शायद साल में एक बार या वो भी नही।” मलिक को जितनी भी जानकारी मिली थी, वो एक फाइल में पढ़ कर बता रहा था। सब कुछ बताने के बाद उसने फाइल बंद किया और युग के सामने खड़ा हो गया।
“आई होप बात सिर्फ इतनी ही हो, जो मैं सोच रहा हूं वो बस मेरे मन का एक वहम ही हो।” युग ने गहरी सांस लेकर कहा।
“शायद आपके मन का वहम ही होगा। एक बार के लिए मुझे भी लगा था की वही माफिया प्रिंसेस है... लेकिन ऐसा नहीं है। सब जानते है कि सारा सिंघानिया आदित्य सिंघानिया और पब्लिक के सामने कम ही आई है लेकिन जितनी बार आई है उसे ही देखा गया है और ना कि उसकी दोस्त को... एक बात और है, जिसके वजह से मेरा डाउट डाउट ही रह जाता है। हाई क्लास पार्टीज और मीटिंग्स में, जहां सारा का जाना इंपॉर्टेंट होता है वहां कृशा कभी नहीं होती थी। अमृता ने अपनी बेटी को माफिया की दुनिया से अलग रखा। अगर वो असली माफिया प्रिंसेस होती, तो ये पॉसिबल नही था।” मलिक ने युग की बात तुरंत समझ ली कि वो क्या कहना चाहता है। उसी के बेसिस पर उसने अपनी राय रखी।
“हां सही कहा। फिर तो वो उस अमृता की ही बेटी है। ठीक है फिर हमें उससे कोई खतरा नहीं है। उसके ठीक होते ही उसे यहां से भेजने की तैयारी करो और फिर हम मास्टर प्लान पर काम करेंगे।” कहकर युग वहां से चला गया।
सारा के बर्ताव से युग को कहीं ना कहीं डाउट हो गया था कि कहीं कृशा तो रियल माफिया प्रिंसेस नहीं है लेकिन मालिक की रिपोर्ट्स लाने के बाद वो श्योर हो चुका था कि असली माफिया प्रिंसेस सारा सिंघानिया ही है और उसने कृशा को छोड़ने का फैसला ले लिया था।
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आखिर डेविल का दिमाग है हर तरफ सोचेगा। बाकी देखते हैं कृशा अगर यहां से चली गई तो क्या आदित्य सिंघानिया सारा को निकालने में कामयाब हो पाएंगे और युग का मास्टर प्लान क्या हो सकता है। ये आगे जाकर रिवील हो जाएगा। चलिए मिलते हैं अगले पार्ट पर।