Under the mafia moon - Chapter 24
Under the mafia moonशब्द ने युग को डिनर के लिए डाइनिंग एरिया में आने को कहा था। पहले तो युग ने मना कर दिया लेकिन फिर मीटिंग खत्म होने के बाद युग फ्रेश होकर डाइनिंग एरिया में पहुंचा।
युग डायनिंग एरिया में पहुंचा तो शब्द, सारा और कृशा उसके आने का ही इंतजार कर रहे थे। हालांकि उन्हें इस बात की उम्मीद नही थी कि युग वहां आएगा।
जैसे ही शब्द ने युग को देखा, उसने एक्साइटेड होकर कहा, “मुझे पता था तुम जरूर आओगे। बस तभी हम तुम्हारा वेट कर रहे थे।”
“इतना एक्साइटेड होने की जरूरत नहीं है। मुझे भूख लगी थी और बाहर से ऑर्डर करता तो खाना आने में टाइम लग जाता। यहां सब कुछ रेडी था बस यही सोच कर आ गया।” युग ने चेयर पर बैठते हुए कहा।
“जो भी हो, तुम यहां आए हो यही बड़ी बात है।” सारा ने जवाब दिया और उसके पास वाली चेयर पर बैठ गई।
कृशा ने युग को देखते ही अपनी नज़रें को घुमा ली थी। सारा और युग एक साथ बैठे थे तो शब्द और कृशा एक साथ। सारा युग को खाना सर्व कर रही थी जबकि कृशा की प्लेट में शब्द खाना डाल रहा था।
“तुमने अपनी मेडिसिंस टाइम पर ली ना? डॉक्टर ने बोला था कि तुम उसे स्किप नहीं कर सकती। जल्दी से ठीक हो जाओ क्यूटी पाई... तुम्हारा उतरा हुआ चेहरा अच्छा नहीं लगता।” कृशा के प्लेट में खाना सर्व करते हुए शब्द ने पूछा। उसे चुप देखकर शब्द उसे फ्रेंडली करने की कोशिश कर रहा था।
कृशा ने बिना कुछ कहे हां में सिर हिलाया। वो एक बार फिर युग को इग्नोर कर रही थी और नज़रे नीचे करके चुपचाप खाना खा रही थी। युग भी उसकी तरह चुपचाप खाना खा रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान कृशा पर था जबकि सारा और शब्द आपस में हल्की-फुल्की बातें कर रहे थे।
“मुझे तुम्हारी पार्टिकुलर चॉइस का पता नहीं था फिर भी मैंने थोड़ा बहुत शब्द से पूछ कर तुम्हारे हिसाब से खाना बनाया था।” सारा खाते हुए बोली।
तभी युग ने उससे पूछा, “ये डिनर तुमने बनाया है?”
“पूरा तो नहीं लेकिन थोड़ी बहुत हेल्प की है। मुझे कुकिंग करना अच्छा लगता है। कैसा बना है?” सारा ने एक्साइटेड होकर पूछा।
“आगे से किचन में कदम भी मत रखना। तुम यहां कुकिंग करने नही आई हो।” युग सर्द लहजे में बोला। सारा को लगा कि उसके कुकिंग करने पर युग खुश होगा लेकिन उसका रिएक्शन कुछ खास नहीं था।
“डोंट वरी मैं भी इसके साथ था। इसने अकेले ये सब नहीं किया है। स्टाफ ने भी हेल्प की थी।” सारा का उतरा हुआ चेहरा देखकर शब्द ने कहा।
“हां मैं देख रहा हूं आजकल तुम इसे अकेले रहने ही कहां दे रहे हो।” युग टौंटिंग वे में बोला।
शब्द उसके कहने का मतलब समझ रहा था इसलिए उसने आगे कुछ नहीं कहा। उसने युग और सारा से हटाकर कृशा की प्लेट की तरफ देखा तो उसका खाना लगभग वैसा ही पड़ा हुआ था।
“अरे तुम क्या कर रही हो? तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है ऊपर से तुम कुछ खा नहीं रही। अगर तुम्हें ये अच्छा नहीं लग रहा है, मैं तुम्हारे लिए कुछ और बनवा देता हूं।” कहकर शब्द उठकर जाने को हुआ, तभी कृशा ने उसका हाथ पकड़ा और उसे रोकते हुए कहा, “नहीं शब्द... मैं ठीक हूं और मेरी खाने को लेकर कोई पार्टिकुलर चॉइस नहीं है। तुम प्लीज मेरे लिए परेशान मत हो। चलो बैठो खाना खाओ।” बोलते हुए कृशा ने शब्द का हाथ पकड़ कर उसे जबरदस्ती वापस चेयर पर बिठा दिया।
“हां शब्द, कृशा बिल्कुल ठीक कह रही है। इसे सब तरह का खाना पसंद है सो डोंट वरी, यू एंजॉय योर मील।” सारा ने कृशा की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा।
वो तीनों आपस में लगे थे जबकि युग उन तीनों को अच्छे से ऑब्जर्व कर रहा था। उसकी आंखें गुस्से से लाल हो गई, जब उसने कृशा को शब्द का हाथ पकड़े हुए देखा।
युग टेबल से उठा और सख्त आवाज में कहा, “मेरा हो गया है और प्लीज आगे से मुझे इस तरह की फालतू की गैदरिंग का नाम लेकर मत बुलाना। आई वॉज इन इंपॉर्टेंट मीटिंग।” कहकर युग वहां से चला गया।
शब्द ने उसके पीछे जाने की कोशिश की लेकिन सारा ने उसे रोकते हुए कहा, “तुम सबकी बहुत फिक्र करते हो शब्द। यू नो वेरी वेल युग कैसा है। उसके पीछे जाने की जरूरत नहीं है। अगर तुम उसे मनाने गए तो वो तुम पर ही गुस्सा करेगा।”
शब्द ने उसकी बात पर बिना कुछ कहे हामी भरी और वापस बैठ गया। वो युग के बर्ताव को काफी गौर से ऑब्जर्व कर रहा था।
खाना खाते हुए शब्द के दिमाग में काफी कुछ चल रहा था। उसने अपने मन में कहा, “ये कुछ और था जिसे मैं... जिसे शायद सिर्फ मैं ही फील कर सकता हूं। समवन इज जेलिस? ये कृशा के लिए था या सारा के लिए...” शब्द अपने उधेड़बुन में खोया हुआ था।
वही सारा और कृशा को युग के बर्ताव में कुछ अजीब नहीं लगा। वो दोनो चुपचाप खाना खा रही थी वहीं दूसरी तरफ युग गुस्से में अपने रूम में था।
“देट गर्ल... मैं क्यों लो फील कर रहा हूं.. वो किसी का भी हाथ पकड़े या कुछ और... मुझे क्या? ये लड़की... ये मुझे इफेक्ट कर रही है। मुझे कुछ भी करके इसे यहां से निकालना होगा... मेरे और सारा सिंघानिया के बीच कोई नही आ सकता। मैं किसी कृशा चौधरी को अपनी सक्सेस का रोड़ा नही बनने दूंगा।” युग ने गुस्सा में कहा।
युग गुस्से में अपने कमरे से निकला और अपना ब्लूटूथ ऑन करके कॉल पर बोला, “मीटिंग रूम में आओ राइट अवे।”
युग बात करते हुए लिफ्ट की तरफ बढ़ा। फर्स्ट लिफ्ट बीजी होने के कारण वो दूसरी लिफ्ट की तरफ जा ही रहा था, तभी उस लिफ्ट से कृशा निकली।
युग को देखते ही कृशा वापिस जाने को मुड़ी। “वो... वो गलती से इस फ्लोर...” कृशा की बात पूरी भी नही हुई कि युग ने पकड़कर उसे वॉल से लगा लिया।
“मैं... मैं गलती से आई थी... मैने सारा को कुछ नही बताया। फिर तुम मुझ पर गुस्सा क्यों कर रहे हो?” कृशा ने डरते हुए कहा। वो युग की आंखों में उसका गुस्सा अच्छे से महसूस कर सकती थी।
“क्या करने की कोशिश रही हो तुम कृशा? अपनी इस फेक मासूमियत से मेरे भाई को इंप्रेस करना चाहती हो? ये ड्रामा यहां नहीं चलने वाला।” युग ने कृशा की आंखों में देखते हुए कहा।
युग की बात सुनकर कृशा की आंखें नम होने लगी। वो भरी आवाज में बोली, “मैं ऐसा कुछ नही कर रही... प्लीज लेट मी गो।” बोलकर कृशा वहां से जाने को हुई लेकिन युग ने उसके दोनों हाथों को कसकर पकड़ लिया और उसे जाने से रोक दिया।
फिर युग ने उसके हाथों को छोड़ते हुए कहा, “बाकी लोग तुम्हारे चेहरे की मासूमियत देखकर इंप्रेस हो सकते हैं लेकिन मैं नहीं। मैं इसके पीछे की सच्चाई अच्छे से जानता हूं और तुम जैसी लड़कियों को भी, जो दिन में किसी का हाथ पकड़ कर उनका दिल जीतने की कोशिश करती है तो रात को बहाने से उनकी बाहों में आकर... अपना मकसद पाने के लिए ऐसा कितनों के साथ किया है तुमने कृ...”
युग की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि तभी उसके गाल पर कृशा का हाथ था, जिसने गुस्से में उसको कसकर थप्पड़ लगाया था। हालांकि उसके बाद कृशा को डर लग रहा था कि उसने युग पर हाथ उठा दिया। इसकी कीमत उसे भारी पड़ने वाली थी।
“हाउ डेयर यू... तुमने गलत इंसान के ऊपर हाथ उठाया है।” कृशा के ऐसा करने पर युग काफी गुस्से में था। उसने उसी वक्त कृशा के गाल पर जवाब में थप्पड़ लगाया।
युग इतने गुस्से में था कि उसने उस थप्पड़ में अपना पूरा बदला ले लिया था। कृशा की आंखों में आंसू थे और उसके गाल पर युग के हाथ का निशान छपा हुआ था। कृशा के होंठ के कोने में से खून भी आ रहा था। युग जलती हुई निगाहों से उसकी तरफ देख रहा था।
युग का ध्यान तब टूटा... जब उसने कृशा की सिसकी सुनी। उसके बाद कृशा ने कुछ नहीं कहा और दौड़कर लिफ्ट में चली गई।
कृशा के जाने के बाद युग ने जिस हाथ से कृशा को थप्पड़ मारा था, उसी हाथ को दीवार पर पागलों की तरह पंच करने लगा, जब तक कि उसे खून नहीं आ गया।
“आई हेट यू... हाउ डेयर यू टू स्लेप मी...” युग ने चिल्लाकर कहा और फिर लिफ्ट की तरफ जाने लगा।
कृशा के एक थप्पड़ ने युग के इमोशंस को बदल कर रख दिया था और इस वक्त उसके मन में सिर्फ और सिर्फ बदले की भावना थी।
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इतने दिनों तक तो आप काफी अच्छा रिस्पांस देते थे। अब पार्ट रेगुलर आ रहे हैं तो कमेंट करना ही बंद कर दिया लगता है। जब रेगुलर पार्ट पब्लिश नहीं होते थे, तब हर चैप्टर पर आपके अच्छे कमेंट आते हैं। प्लीज ऐसा मत कीजिए और अपने राइटर को सपोर्ट कीजिए ताकि वो दिल से कहानी लिखे। चलिए मिलते हैं अगले पार्ट पर, आपको क्या लगता है युग और कृशा का रिश्ता अब क्या अंजाम लेने वाला है? युग का पता नहीं लेकिन कृशा के दिल में उसके लिए बेइंतहा नफरत पैदा होने की शुरुआत है।
Meet mr arrogant aarav khurana in "tied by destiny"
न्यूज़ चैनल से लेकर सोशल मीडिया तक सब जगह एक ही न्यूज़ ट्रेंड कर रही थी। एक्ट्रेस अनुष्का ओबरॉय अब इस दुनिया में नहीं रही थी। होटल साज की टेरेस से गिरकर उनकी मौत हो गई थी।
उनकी मौत की न्यूज बाहर आते ही पुलिस भी एक्टिव हो गई। इस केस में सस्पेक्ट के तौर पर आरव खुराना का नाम सामने आ रहा था।
खुराना इंडस्ट्रीज के 35वे फ्लोर पर आरव अपने केबिन में बैठा था। उसके पास कबीर खड़ा था। दोनो सामने लगी स्क्रीन में यही न्यूज देख रहे थे। कबीर ने आरव की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
“सर...” कबीर ने आरव की तरफ देखकर कहा, “आपके दिमाग में क्या चल रहा है?”
“दादी की तबियत कैसी है कबीर?” आरव ने पूछा।
कबीर को लगा आरव उससे केस के बारे में बात करेगा। उसके लीक से हटकर कुछ पूछने पर कबीर ने चौंकते हुए कहा, “हां सर?”
“तुम पिछले छह साल से मेरे साथ हो... अब तक इतना तो समझ आ गया होगा मुझे बात रिपीट करना पसंद नहीं है।” आरव ने उसकी तरफ घूरकर देखा।
“हां सर,... सॉरी सर। दादी, वो उनके कल सारे टेस्ट फिर से होंगे। डॉक्टर ने कहा है उन्हें एक्स्ट्रा केयर और 27/7 अटेंशन की जरूरत है। थोड़ी सी भी टेंशन उनके दिमाग के लिए ठीक है।” कबीर ने बताया।
“हम्म... घर का वाईफाई कनेक्शन कट करवा दो। केस की पहली सुनवाई में मेरी बेगुनाही का सबूत लेकर खन्ना कोर्ट पहुंच जाना चाहिए।” आरव ने उसे सब समझाते हुए कहा।
कबीर ने मुस्कुराते हुए जवाब में कहा, “ऑफिस की सीसीटीवी फुटेज की कॉपी मैने पहले ही पहुंचा दी है।”
“तो फिर ये मीडिया रिपोर्ट्स? ये मुझे क्यों कल्प्रिट साबित करने पर तुले है।” आरव ने इरिटेट होकर पूछा।
“इनके कहने से क्या होता है सर... अगर सबूत पुलिस स्टेशन नही पहुंचते तो अब तक आपका फेवरेट इंस्पेक्टर रोहन उछलता हुआ आ चुका होता।” कबीर ने खुश होकर जवाब दिया। वो अक्सर आरव के कहे बिना ही उसकी इस तरह की प्रोब्लम्स सॉल्व कर देता था।
“गुड... ऐसा करो इन सभी न्यूज़ चैनल्स को डीफिमेशन का नोटिस भिजवाओ। उस रिपोर्टर की क्या रिपोर्ट है?” आरव ने पूछा।
“मैने अभी भी उसे नीचे कैद कर रखा है। कल रात उसे गिराता तो चीजें ज्यादा उलझ जाती।” कबीर ने जवाब दिया।
“सही किया।” आरव ने कहा और वहां से उठकर जाने लगा।
“सर आप इस टाइम कहा जा रहे है... वो मीटिंग... युवानी...।” कबीर उठकर उसके पीछे आने लगा।
“तुम मेरी वाइफ नही हो कबीर, जो मैं तुम्हें अपने पल पल की रिपोर्ट दूं। युवानी को बोल देना... मीटिंग में मेरी प्रेजेंस चाहिए तो बारह घंटे पहले बताया करें।” आरव ने बिना मुड़े कहा और सीधा अपनी प्राइवेट लिफ्ट में चला गया।
“हां जैसे अपनी वाइफ को तो ये सब बताने वाले ही है।” कबीर ने आंखे घुमाकर कहा।
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