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Chapter 23

Under the mafia moon - Chapter 23

Under the mafia moon

अगली सुबह तय समय पर युग की आंख खुली तो कृशा उसकी बाहों में सोई हुई थी। ऊपर से उसने उसे काफी कसकर पकड़ भी रखा था। कृशा को ऐसा करते देख ना चाहते हुए भी युग के फेस पर स्माइल आ गई।

“कल रात को कोई बहुत बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था और साथ ही अपनी लिमिटस भी बता रहा था। उस लड़की को किसी के साथ बेड शेयर करने की आदत नहीं है और ना ही किसी के साथ सोने की... आज वही बड़ी-बड़ी बातें करने वाली लड़की उस इंसान की बाहों में चिपक कर सो रही हैं, जिससे वो नफरत होने का दावा करती है।” युग ने धीरे से बड़बड़ा कर कहा। “चलो उठो भी अब...।” युग ने कृशा को जगाने की कोशिश की तो वो गहरी नींद में थी।

“वैसे तो मेरे उठने का टाइम हो गया है लेकिन मैं चाहता हूं कि पहले तुम उठो और खुद को मेरे साथ इस पोजीशन में देखो... तब देखते हैं तुम्हारा क्या रिएक्शन होगा। लगता है मुझे यही पनिशमेंट देनी चाहिए थी तुम्हें, अपने साथ सोने की... तुम्हारा तो खुद के ऊपर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं है कृशा चौधरी।” बोलते हुए युग के फेस पर इविल स्माइल थी। उसने कृशा को कमर से पकड़ा और जानबूझकर उसे अपने ऊपर लेटा दिया।

“वस्ट मॉर्निंग... ए वेरी वस्ट मॉर्निंग इज वेटिंग फॉर यू।” कहते हुए युग ने अपनी आंखें बंद कर ली। उसका हाथ कृशा के पीठ पर था। कुछ देर बाद युग आंखें खोलकर अजीब नज़रों से कृशा को देख रहा था।

अचानक युग ने महसूस किया कृशा के उसके इतना करीब होने से उसके दिल की धड़कनें बढ़ रही थी। ये पहली बार था जब कोई लड़की उसके इतना पास आई थी। पहले भी उसने गलती से कृशा को किस कर दिया था और अब ये सब...।

खुद के अंदर बदलाव को देखकर युग ने कहा, “ये बिल्कुल ठीक बोल रही थी। इसे सजा देने के चक्कर में मैं खुद को टॉर्चर कर रहा हूं। दिस इज नॉट माय वे...”

पहले जहां युग कृशा के उठने का इंतजार कर रहा था, वहीं अब उसने अपना हाथ बढ़ाकर नाइट स्टैंड पर रखा अपना मोबाइल लिया और उसमें एक अजीब सी रिंग प्ले करके कृशा के कान के पास कर दिया।

साउंड तेज होने की वजह से कृशा की आंख खुली और वो हड़बड़ा कर उठने लगी। उठते ही कृशा ने खुद को युग के ऊपर लेटे हुए पाया। खुद को इस पोजीशन में देखकर कृशा की आंखें हैरानी से बड़ी हो गई तो वही युग उसे देखकर इविल स्माइल कर रहा था।

“लगता है बाकी लड़कियों की तरह तुम्हारी भी मुझे देखकर नियत फिसल रही है। ये तो अच्छा हुआ मैंने तुम्हें टाइम से जगा दिया वरना तुम तो पता नही, मेरे साथ क्या कुछ कर देती। चलो अब उठो मेरे ऊपर से।” जैसे ही युग ने कहा। कृशा जल्दी से उसके ऊपर से खड़ी हो गई।

कृशा कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत थी और फिर उसने अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा, “वो... वो मुझे पता नहीं चला कब मेरी आंख लग गई। मैंने... मैंने कुछ किया तो नहीं ना? आई मीन मैने क्या किया होगा? मैंने कुछ नहीं किया। कही तुमने तो मेरे साथ कुछ नहीं किया ना?”

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“रियली? तुम्हें लगता है तुम ऐसी हो, जिसके मैं तुम्हारे साथ कुछ करूंगा? तुम्हारी इतनी अच्छी किस्मत नहीं है कि युग राणा तुम्हें टच भी करें।” युग ने आईज रोल करके जवाब दिया और उठकर अपनी शर्ट पहनने लगा।

“हां, फिर तो मेरी किस्मत बुरी ही ठीक है।” कृशा ने जवाब दिया और उठकर बाथरूम में चली गई।

वही उसके ऐसा कहने पर युग के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। उसने अपने कपड़े लिए और पहन आ गया। बाहर आते हुए उसने इधर-उधर देखा ताकि कोई उसे वहां से निकलते देख ना ले खासकर सारा।

“तुम खुद से सारा को कुछ नहीं बताओगी। मैं पूरी रात रूम में नहीं आया इसलिए वो पूछेगी तो जरूर कि मैं कल रात कहा था। खैर क्या फर्क पड़ता है? वो तो खुश ही हुई होगी कि मैं रूम में नहीं आया।” युग चलते हुए खुद से बातें कर रहा था। फिर वो अपने कमरे में पहुंचा तो उसने देखा लाइट्स ऑफ थी और कमरा भी अच्छे से सेटल था।

“इसका मतलब तुम भी कल रात इस कमरे में नहीं थी। फिर तुम पूरी रात कहा थी सारा सिंघानिया? ये जानना तो बनता है।” बोलते हुए युग बेड पर बैठ गया। उसने तुरंत अपने आईपैड पर पूरे घर की फुटेज निकाली।

उसे आखरी बार सारा शब्द के साथ उसके कमरे में जाती दिखी तो युग ने शब्द के कमरे का फुटेज पर क्लिक किया। वो दोनों साथ में मूवी देख रहे थे। उसके बाद सारा शब्द के कंधे पर सोई हुई थी।

“लगता है यहां काफी कुछ पक रहा है वो भी मेरी नाक के नीचे से... क्या फर्क पड़ता है कि तुम्हारा दिल कोई भी जीते सारा सिंघानिया? मुझे माफिया किंग बनना है और उसकी चाबी तुम हो। मैं अपनी पोजीशन हासिल करके रहूंगा। रही बात तुम्हारा दिल तोड़कर बदला लेने की, तो लगता है दादू का ये काम इस बार उनका दूसरा पोता पूरा करेगा। चलो अच्छा है इसी बहाने मुझे किसी के साथ बेवजह की फॉर्मेलिटी नहीं करनी पड़ेगी।” सारा को शब्द के साथ देखकर युग के दिल में एक परसेंट भी जलन का भाव नहीं था।

युग ने अपना आईपैड बेड पर फेंका और तैयार होने के लिए चला गया।

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पूरे दिन युग अपने कामों में व्यस्त था। उसकी दिन में एक बार भी सारा, कृशा या शब्द से मुलाकात नहीं हुई थी और ना ही उसने इस तरफ खास ध्यान दिया था।

रात को डिनर से पहले शब्द ने युग को कॉल किया।

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“जल्दी बोलो कोई काम है तो, मैं इस वक्त बहुत बिजी हूं।” कॉल उठाते ही युग ने रूखे तरीके से जवाब दिया। वो इस वक्त एक मीटिंग में था। फिर भी उसने शब्द का कॉल पिक कर लिया था।

उसके कहते ही शब्द जल्दी से बोला, “हां आई नो तुम बिजी हो पर आज हमने एक स्पेशल डिनर प्लान किया है। काफी टाइम बाद हम साथ में खाना खाएंगे। सारा और कृशा भी है प्लीज तुम आ जाओ डिनर पर। इट्स ए काइंड ऑफ फैमिली गैदरिंग।”

“तुम जानते हो ना मुझे फैमिली गैदरिंग पसंद नहीं है और याद रखो वो दोनों हमारी फैमिली नहीं है और ना ही स्पेशल... तुम्हें जो करना है करो, मैं नहीं आ रहा।” कहकर युग कॉल कट करने को हुआ लेकिन तभी शब्द फिर से तुरंत बोला, “हम तुम्हारा वेट कर रहे हैं। अब देख लो, तुम कब तक वापस लौट पाओगे।”

युग ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और कॉल कट कर दिया। उसकी मीटिंग लगभग खत्म हो चुकी थी।

युग अपने सारे काम विला से ही संभालता था। वो विला इतना बड़ा था कि किसी को इस बात का एहसास भी नहीं था कि उसके कौन से हिस्से में क्या बना हुआ हो सकता है। लगभग आधे घण्टे में उसकी मीटिंग पूरी तरह खत्म हो गई थी।

मीटिंग खत्म होते ही युग के क्लाइंट जा चुके थे। उनके जाते ही मलिक ने युग के पास आकर कहा, “आप फ्रेश हो जाइए तब तक मैं डिनर ऑर्डर कर देता हूं। कुछ स्पेशल खाने का मन है तो बता दीजिए।”

युग ने गहरी सांस लेकर छोड़ी। वो उसे कुछ जवाब देता उससे पहले उसे शब्द की याद आई, जिसे लगभग आधे घंटे पहले उसे डिनर के लिए कॉल किया था।

“मैं घर जा रहा हूं। वहीं पर डिनर करूंगा। तुम यहां का सब समेट लेना और इन लोगों पर नजर रखना। ये डील काफी बड़ी है। मैं नहीं चाहता कि इसमें कोई बीच में टांग अड़ाएं। अगर हमारे अलावा ये किसी से मिलने की कोशिश भी करें तो उनके साथी को उड़ा देना।” जाने से पहले युग ने मलिक को सारे इंस्ट्रक्शंस दे दिए थे।

मलिक को सब समझाने के बाद युग वहां से चला गया। मलिक ने उसके जाने के बाद खुद से कहा, “जरूर सारा सिंघानिया ने उनके लिए कुछ प्लान किया होगा। इट्स गुड सारा सिंघानिया कि तुम खुद से उनके करीब आने की कोशिश कर रही हो। इसी में तुम्हारी भलाई है।”

उसके बाद मलिक डिनर पर जाने से पहले युग के दिए हुए कामों को निपटा रहा था।

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ओके देखते हैं डिनर गैदरिंग में कौन से नए सरप्राइज मिलते हैं। और हां, पार्ट छोटे होते है, तभी दो पब्लिश करती हूं। पढ़कर समीक्षा कर दीजिएगा।

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