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Chapter 3

Tied with destiny - Chapter 3

Tied with destiny

न्यूज़ चैनल से लेकर सोशल मीडिया तक सब जगह एक ही न्यूज़ ट्रेंड कर रही थी। एक्ट्रेस अनुष्का ओबरॉय अब इस दुनिया में नहीं रही थी। होटल साज की टेरेस से गिरकर उनकी मौत हो गई थी।

उनकी मौत की न्यूज बाहर आते ही पुलिस भी एक्टिव हो गई। इस केस में सस्पेक्ट के तौर पर आरव खुराना का नाम सामने आ रहा था।

खुराना इंडस्ट्रीज के 15वे फ्लोर पर आरव अपने केबिन में बैठा था। उसके पास कबीर खड़ा था। दोनो सामने लगी स्क्रीन में यही न्यूज देख रहे थे। कबीर ने आरव की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।

“सर...” कबीर ने आरव की तरफ देखकर कहा, “आपके दिमाग में क्या चल रहा है?”

“दादी की तबियत कैसी है कबीर?” आरव ने पूछा।

कबीर को लगा आरव उससे केस के बारे में बात करेगा। उसके लीक से हटकर कुछ पूछने पर कबीर ने चौंकते हुए कहा, “हां सर?”

“तुम पिछले छह साल से मेरे साथ हो... अब तक इतना तो समझ आ गया होगा मुझे बात रिपीट करना पसंद नहीं है।” आरव ने उसकी तरफ घूरकर देखा।

“हां सर,... सॉरी सर। दादी, वो उनके कल सारे टेस्ट फिर से होंगे। डॉक्टर ने कहा है उन्हें एक्स्ट्रा केयर और 27/7 अटेंशन की जरूरत है। थोड़ी सी भी टेंशन उनके दिमाग के लिए ठीक है।” कबीर ने बताया।

“हम्म... घर का वाईफाई कनेक्शन कट करवा दो। केस की पहली सुनवाई में मेरी बेगुनाही का सबूत लेकर खन्ना कोर्ट पहुंच जाना चाहिए।” आरव ने उसे सब समझाते हुए कहा।

कबीर ने मुस्कुराते हुए जवाब में कहा, “ऑफिस की सीसीटीवी फुटेज की कॉपी मैने पहले ही पहुंचा दी है।”

“तो फिर ये मीडिया रिपोर्ट्स? ये मुझे क्यों कल्प्रिट साबित करने पर तुले है।” आरव ने इरिटेट होकर पूछा।

“इनके कहने से क्या होता है सर... अगर सबूत पुलिस स्टेशन नही पहुंचते तो अब तक आपका फेवरेट इंस्पेक्टर रोहन उछलता हुआ आ चुका होता।” कबीर ने खुश होकर जवाब दिया। वो अक्सर आरव के कहे बिना ही उसकी इस तरह की प्रोब्लम्स सॉल्व कर देता था।

“गुड... ऐसा करो इन सभी न्यूज़ चैनल्स को डीफिमेशन का नोटिस भिजवाओ। उस रिपोर्टर की क्या रिपोर्ट है?” आरव ने पूछा।

“मैने अभी भी उसे नीचे कैद कर रखा है। कल रात उसे गिराता तो चीजें ज्यादा उलझ जाती।” कबीर ने जवाब दिया।

“सही किया।” आरव ने कहा और वहां से उठकर जाने लगा।

“सर आप इस टाइम कहां जा रहे है... वो मीटिंग... युवानी...।” कबीर उठकर उसके पीछे आने लगा।

“तुम मेरी वाइफ नही हो कबीर, जो मैं तुम्हें अपने पल पल की रिपोर्ट दूं। युवानी को बोल देना... मीटिंग में मेरी प्रेजेंस चाहिए तो बारह घंटे पहले बताया करें।” आरव ने बिना मुड़े कहा और सीधा अपनी प्राइवेट लिफ्ट में चला गया।

“हां जैसे अपनी वाइफ को तो ये सब बताने वाले ही है।” कबीर ने आंखे घुमाकर कहा।

कबीर वहां से आरव का काम संभालने के लिए नीचे के फ्लोर पर चला गया। जबकि आरव इस वक्त कहां गया था, इस बारे में सिवाय उसके किसी को पता नही था।

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ओबेरॉय मेंशन में गम का माहौल था। अनुष्का की डेडबोडी के अंतिम दर्शन के लिए बी टाउन से लेकर नाती रिश्तेदारो की लंबी भीड़ थी। मीडिया को अंदर आना अलाऊ नही था तो सब घर के आगे जमा थे। अनुष्का के अंतिम संस्कार से पहले की सभी जरूरी विधियां की जा रही थी।

वही इन सबसे दूर आयुष्का अभी भी हॉस्पिटल में थी। अयान के मना करने के बावजूद वो उसे एक सर्जरी में असिस्ट कर रही थी। उसके दिल का दर्द उसकी आंखों से साफ झलक रहा था।

“क्यूं खुद को तकलीफ दे रही हो आयु... ऐसा करने से वो वापिस नही आ जायेगी।” अयान ने बीच सर्जरी में आयु की तरफ देखकर सोचा।

“डॉक्टर सिद्धि... पेशेंट की फैमिली को बोलो उसकी कंडीशन स्टेबल है।” अयान ने सर्जरी खत्म करके कहा। बाहर जाने से पहले उसने तेज आवाज में आयुष्का से कहा, “डॉक्टर आयुष्का, कम टू माय केबिन....”

आयुष्का ने उसकी बात पर हामी और स्टोर रूम में चेंज करने चली गई। अगले दस मिनिट में वो अयान के साथ उसके केबिन में थी।

“तुम अभी मेरे साथ चल रही हो। आई डोंट वांट एनी आर्गुमेंट।” अयान ने सख्त आवाज में कहा और आयुष्का का हाथ पकड़कर उसे ले जाने लगा।

“अयान छोड़ो मुझे.... व्हॉट द हेल आर यू डूइंग....सब हमारी तरफ देख रहे है।” आयु ने अयान से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की।

हॉस्पिटल में काम करने वाला स्टाफ उन्ही की तरफ देख रहा था लेकिन अयान को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो आयुष्का को जबरदस्ती अपनी गाड़ी के पास लेकर गया और उसे बैठा दिया।

वो ड्राइविंग सीट पर था और उसे कही ले जा रहा था।

“गाड़ी रोको अयान....तुम क्यों कर रहे हो मेरे साथ ये....मुझे कही नही जाना।” आयुष्का रोते हुए बोली।

अयान काफी फास्ट ड्राइव कर रहा था। उसने आयुष्का की तरफ देखे बिना कहा, “यही सवाल मेरा है। तुम खुद के साथ ये क्यों कर रही हो? तुम अनु से कितना प्यार करती हो, ये मुझसे बेहतर और कोई नही जान सकता। तुम अच्छे से जानती हो इस वक्त तुम्हारा कहां होना ज्यादा जरूरी है।”

“मैने....मैं उसे नही बचा पाई अयान।” आयुष्का ने रोते हुए कहा।

“तुम्हारी गलती नही हैं। उसे हॉस्पिटल लाया गया तब तक उसका काफी सारा ब्लड लॉस हो चुका था। चोट सीधे सिर के नाजुक हिस्से पर लगी थी। एक डॉक्टर होकर तुम ऐसे बेवकूफों जैसी बातें कैसे कर सकती हो।” अयान ने उसे डांटा।

कुछ देर बाद गाड़ी मुंबई के शमशान घाट के आगे रुकी। अयान गाड़ी से बाहर निकला और आयुष्का का हाथ पकड़कर उसे बाहर निकालने लगा।

“न....नही अयान। प्लीज ये मत करो। मैं.... मैं उसे ऐसे नही देख पाऊंगी।” आयुष्का रोने लगी। वो गाड़ी से बाहर नहीं निकल रही थी।

अयान ने उसकी एक नही सुनी और जबरदस्ती उसे अंदर ले गया। अंदर अनुष्का का अंतिम संस्कार बस होने ही वाला था। सब आयुष्का के आने का इंतजार कर रहे थे।

रुद्र ने नम आंखों से आयुष्का की तरफ देखा। उसने अनुष्का के शरीर को अग्नि दी। कुछ ही देर में उसका शरीर अग्नि में विलीन हो गया। सब लोग वहां से चले गए लेकिन आयुष्का अभी भी वही थी।

“तुमने चीटिंग की है। तुम....तुम मुझे अकेले छोड़कर चली गई अनु। तुमने अपने हिस्से की हर चीज पहले मुझे दी है.. तो जब मरने की बारी आई तो मौत भी पहले मुझे आनी चाहिए थी।” आयुष्का वहां नीचे बैठी पागलों की तरह रो रही थी।

अयान उसके पास आया और उसे संभालने लगा। “इट वॉज जस्ट एन एक्सीडेंट। ये किसी के साथ भी हो सकता हैं।”

“नही.... नो अयान, इट वॉज नॉट जस्ट एन एक्सीडेंट। उसने.... उस आरव खुराना ने मारा है मेरी बहन को।” आयुष्का चिल्लाकर बोली।

अयान ने कुछ नहीं कहा। आयुष्का रोते हुए बोली, “मै... मैं उसे बरबाद कर दूंगी अयान।”

“तुम्हें क्या हो गया है आयु। अपनी लाइफ में आगे बढ़ने का सोचो। अनु अब इस दुनिया से जा चुकी है। तुम्हे इस सच को एक्सेप्ट करना होगा। इसके लिए तुम, मैं या आरव खुराना, हम में से कोई जिम्मेदार नहीं है” अयान उसे समझाने लगा। “अक्सर दूसरों की बरबादी सोचने वाले खुद बरबाद हो जाते है आयु।”

“मुझे अपनी हर बरबादी मंजूर है। मेरी जिंदगी तो अनु के साथ ही खत्म हो गई है। पर उसे नही छोडूंगी मैं।” आयुष्का ने अपने आंसू पोंछे और वहां से उठकर बाहर जाने लगी।

“ये किस जिद पर अड़ गई हो तुम आयु। आरव खुराना.... तुम.... तुम नही जानती वो कौन है। भगवान ना करें कि गलती से भी वो दिन आए जब तुम आरव की जिंदगी का हिस्सा बनो। वो पहले से बरबाद है.. उसे किसी को खोने का डर नहीं... पर तुम्हारी जिद तुम्हें ना तबाह कर दे।” अयान के चेहरे पर घबराहट थी।

उसके बात करने का लहजा बता रहा था जैसे उसने आरव का वो चेहरा देखा था, जो दुनिया की नजरों में अब तक एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन के नकाब के पीछे छुपा था।

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रात के 1:00 बज रहे थे। मुंबई से दूर महातवली बीच पर, जहां अरेबियन सी कोस्ट था, वहां एक बड़ी सी शिप आकर रुकी। शिप के बाहर एक बड़ा सा ट्रक था। कुछ लोग उस शिप से बहुत बड़े बड़े बक्से ट्रक के अंदर डाल रहे थे।

“लोकेशन सेट की हुई है। ड्राइवर भरोसे का तो है ना... माल बहुत कीमती है। अगर थोड़ा भी इधर उधर हुआ तो बात सीधी जान पर बनेगी।” एक लगभग पचास साल का आदमी किसी लड़के से बात कर रहा था।

वो लड़का उम्र से 22 या 23 साल का लग रहा था। उसने जवाब में कहा, “उम्र अपन की भले ही कम है पर इस काम में सालों से लगे हैं। बेईमानी या घपले का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। ट्रक अपनी जगह पर पहुंच जाएगा भाऊ।”

उस आदमी ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया। लड़के ने उस आदमी से हाथ मिलाया और ट्रक में जाकर बैठ गया। कुछ ही देर में वो बक्सों वाला ट्रक वहां से रवाना हो गया। इसी के साथ वो आदमी निश्चिंत हो गया और उसी शिप के साथ वहां से चला गया।

उनसे कुछ दूर आरव कबीर के साथ गाड़ी में बैठा हुआ था। वो शिप से काफी दूर थे। उन्हें ठीक से कुछ खास दिखाई नहीं दे रहा था पर ट्रक के जाते ही उन दोनों के फेस पर स्माइल आ गई।

“बस अब धमाके का इंतजार है कबीर। देखना इस बार बेचारी को कुछ ज्यादा ही बड़ा नुकसान होगा। बहुत रोएगी वो, मुझे कोसेगी और यही बद्दुआ देगी कि ना जाने किस घड़ी में उसने मुझे तकलीफ देने के बारे में सोचा।” आरव ने मुस्कुरा कर कहा, जिस पर कबीर ने हामी भरी।

उसने कबीर को चलने का इशारा किया। इसी के साथ दोनों वहां से चले गए।

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