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Chapter 16

Tied with destiny - Chapter 16

Tied with destiny

मंथन ने आयु को उसके घर छोड़ने के बजाय अपार्टमेंट के बाहर अपनी गाड़ी से बाहर निकाल दिया। उसने गाड़ी वापस अंदर पार्क की और ऊपर चला गया।

उसके जाने के बाद आयु अभी तक वहीं पर खड़ी हैरानी से अपार्टमेंट के दरवाजे को देख रही थी।

“समझ नहीं आता इन लड़कों की प्रॉब्लम क्या है? ये इतने कॉम्प्लिकेटेड क्यों होते हैं। पता नहीं अनु इसे कैसे झेलती होगी।” आयु गुस्से में पैर पटकती हुई वहां से अकेले ही चली गई। आगे जाकर उसने कैब की और वहां से फाइट क्लब जाने के बजाय अब अपने घर के लिए निकल गई।

आयु घर पहुंची तो उस समय उसकी पूरी फैमिली डायनिंग टेबल पर ब्रेकफास्ट कर रही थी।

“इससे पहले इन सब का लेक्चर शुरू हो, जल्दी से अपने कमरे में निकल लेती हूं।” आयु ने बड़बड़ाकर कहा। वो सीधे अपने कमरे की तरफ जाने लगी।

“अब ये लड़की और ज्यादा लापरवाह हो रही है। पहले अनु थी तो एटलिस्ट इसे संभाल तो लेती थी, पर अब तो ये किसी की नहीं सुनती।” आयु को देखकर तारा ने हल्के गुस्से में कहा। वो उसे डांटने के लिए उसके पास जा ही रही थी कि जय जी ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें रोक लिया।

“रुकिए तारा, जाने दीजिए उसे।” जय जी ने शांत लहजे में कहा।

“डैड सही कह रहे है मॉम। मैने किया था पता, वो कल लेट नाइट तक हॉस्पिटल में ही थी।” रुद्र ने बताया।

“और उसके बाद?” तारा ने गुस्से में कहा, “उसके बाद तो ये घर नहीं आई थी ना। अब अनु नहीं है जो हमें इसकी हर पल की अपडेट दे सके। इससे कुछ पूछो तो ये उल्टा झगड़ा करने पर आ जाती है। पता नहीं इसे कब समझ आएगा हमें इसकी भी परवाह है।” बोलते हुए तारा भावुक होने लगी।

रुद्र ने उठकर उन्हें चेयर पर बिठाया और पानी का गिलास दिया। फिर उसने कहा, “डोंट वरी मॉम... मैं देख लूंगा।”

“वो भी अनु के बहुत क्लोज थी और उसके जाने के बाद अब तक खुद को नहीं संभाल पाई है। ऊपर से अपनी नाराजगी के चलते किसी से बात भी नहीं करती। हमें उसको टाइम देना होगा मम्मी जी।” सिमरन ने भी तारा को समझाने की कोशिश की।

“ना जाने किन किन बातों की नाराजगी लेकर बैठी है। आप चिंता मत करो मॉम। मैं उसके लिए बॉडीगार्ड हायर कर दूंगा। वो एनीटाइम उसे प्रोटेक्ट करेगा और साथ ही उसकी हर पल की अपडेट भी दे देगा।” रूद्र बोला।

उसकी बातों से तारा को कुछ तसल्ली हुई ही थी, तभी जय जी ने कहा, “गलती से भी ऐसा करने का मत सोचना वरना उसे पता चला तो वो ये घर छोड़कर चली जाएगी। मैं नहीं चाहता फिर से उसके मन में ये फीलिंग ग्रो हो कि हम उसे वीक समझते हैं। हमारा उसके लिए ओवरप्रोटेक्टिव होना कब उसके लिए घुटन बन गया इस बात का पता चलते चलते ऑलरेडी काफी देर हो गई थी। वो अकेले अपने दम पर सरवाइव करना चाहती है तो उसे करने दो। जब तक कोई गलती ना करें तब तक बीच में पड़ने की जरूरत नहीं है। वो खुद को संभाल सकती है।” जय जी के बोलने का लहजा सख्त था। उनका नाश्ता हो चुका था इसलिए वो वहां से ऑफिस जाने के लिए निकल गए।

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उनके जाने के बाद तारा ने कहा, “ये कुछ भी बोले लेकिन तुम आयु के लिए गार्ड हायर कर देना। उसे बोलना वो उससे दूर रहे। उसे ये बात पता नहीं चलनी चाहिए।”

“प्लीज ऐसा मत कीजिए मम्मी जी। डैडी जी को पता चला तो वो भी नाराज हो जाएंगे और आयु का गुस्सा तो सातवें आसमान पर होगा ही।” सिमरन ने उन्हें समझाने की कोशिश की।

तारा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और अंदर चली गई। उनके जाने के बाद सिमरन ने उम्मीद भरी नजरों से रुद्र की तरफ देखा तो रुद्र ने जवाब में कहा, “मैं कुछ नहीं कर सकता। मुझे भी अपनी बहन की फिक्र है। एक को खो चुका हूं, बस अब दूसरी को नहीं खोना चाहता। वो चाहे जो भी समझे पर मैं उसके लिए गार्ड हायर करने जा रहा हूं।”

एक-एक करके सब वहां से चले गए। बस सिमरन ही डाइनिंग टेबल पर बैठी थी। उनके जाने के बाद उसने खुद से कहा, “पहले मुझे आयु पर गुस्सा आता था, वो इन लोगों के प्यार को दूसरा ही नाम दे रही है लेकिन अब सच में ये लगता है कि ये उसकी प्राइवेसी तक उससे छीन रहे हैं। वो बच्ची नहीं रही है खुद को संभाल सकती है। इन्हें ये बात समझनी होगी।” सिमरन को उन सब पर बहुत गुस्सा आ रहा था पर इस वक्त उसका कोई जोर भी नहीं चल रहा था।

इस मामले में वो आयु से बात करती तो रुद्र और तारा नाराज हो जाते इसलिए उसने मामले को वही छोड़ा और अपने काम में लग गई।

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आयु अपने कमरे में थी। तैयार होने के बाद वो ब्रेकफास्ट करने के लिए बाहर आई। डाइनिंग टेबल पर सिमरन के अलावा कोई नहीं था। आयु भी वहीं आकर बैठ गई और चुपचाप ब्रेकफास्ट करने लगी।

“कैसी हो तुम?” सिमरन ने पूछा।

“बिलकुल वैसे ही जैसे पहले थी... हां बस आप लोगों की तरह मेरी लाइफ भी बदल गई है।” आयु ने जवाब दिया।

सिमरन उठकर उसके पास वाली चेयर पर आ गई। “बहुत मिस करती हो ना उसे?” सिमरन ने उसके बालों को सहला कर कहा।

आयु ने हां में सिर हिलाया और कहा, “मैं तो उसे भूली ही नहीं हूं भाभी। कभी-कभी लगता है सब मेरी गलती की वजह से हुआ है। हम लोग ऑपरेशन थिएटर में रोजाना किसी न किसी की सर्जरी करते हैं। जिन लोगों के जीने की उम्मीद नहीं होती वो तक ठीक हो जाते हैं पर मैं अपनी ही बहन को नहीं बचा पाई।” बोलते हुए आयु की आंखों से आंसू का कतरा बह गया।

“खुद को संभालो आयु। उसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी। मैंने नोटिस किया है उसके जाने के बाद तुम बहुत कम घर आती हो। किसी से ठीक से बात भी नहीं करती। तुम्हारी नाराजगी के चलते कोई तुमसे ठीक से कुछ पूछ भी नहीं पाता। अब तो कम से कम दिलों में मौजूद दूरियां मिटा दो।” सिमरन उसे काफी प्यार से समझा रही थी। अनु के बाद आयु अगर घर में किसी से ठीक से बात करती थी तो वो सिमरन ही थी।

“कोशिश करूंगी भाभी...” आयु ने हल्का मुस्कुरा कर कहा। उसका ब्रेकफास्ट हो जाने के बाद उसने सिमरन से कहा, “अच्छा भाभी घर पर बोल दीजिएगा कि मेरी नाईट ड्यूटी शिफ्ट हो गई है और किसी वजह से मुझे एक्स्ट्रा ड्यूटी भी करनी पड़ रही है। मेरे एग्जामस पास आने वाले हैं तो कुछ क्लासेस लेनी पड़ेगी। उसके लिए जा रही हूं।”

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“ठीक है अपना ख्याल रखना पर यही बात तो मम्मी जी को बताती तो उन्हें ज्यादा खुशी होती।” सिमरन ने जवाब दिया।

“कोई बात नहीं आप बता दीजिएगा एक ही बात है।” आयु ने बात को टालने के लिए कहा। वो उठी और सिमरन को हल्का सा हग किया। “मैं जानती हूं भाभी आप इन्हें अनु की कमी महसूस नहीं होने देगी। रही बात मेरी तो मुझसे तो इन्हें कभी उम्मीद नहीं थी।”

आयु सिमरन से अलग हुई और उसे बाय बोल कर वहां से चली गई। उसकी गाड़ी हॉस्पिटल में होने की वजह से उसने केब की और सीधा फाइट क्लब पहुंची।

“होप सो आज मैं जहान को मना पाऊं वरना जैसे मेरे घरवालों को मुझ से कोई उम्मीद नहीं है वैसे मुझे भी उस मंथन से कोई उम्मीदें नहीं है। जब देखो रुडली बात करता है। गाड़ी से बाहर निकाल दिया। घर पर भी नहीं छोड़ा। आइ स्वेयर आज अगर अनु जिंदा होती और मुझे उसके इस बिहेवियर का पहले पता होता तो उन दोनों का पक्का ब्रेकअप करा देती। पता नहीं मेरी बहन से कितना झगड़ा किया होगा इस सडू़ इंसान ने।” बड़बडा़ते हुए आयु फाइट क्लब वाले फ्लोर पर पहुंची।

वहां पहुंचकर वो हैरान थी। आज जिम एरिया बिल्कुल खाली था जबकि रिंग एरिया में सारे लोग एक साथ इकट्ठा थे। वहां फाइट चल रही थी और सब उसे बहुत गौर से देख रहे थे। भीड़ में चेयर करने की काफी सारी आवाजें आ रही थी जिससे कुछ साफ समझ नहीं आ रहा था।

“ये क्या आज यहां खुद जॉन सीना फाइट करने आ गया है, जो ये सब लोग इतना एक्साइटेड हो रहे हैं।” आयु ने मुंह बनाते हुए कहा और भीड़ में जाने लगी।

वो भीड़ को साइड करने की कोशिश कर रही थी पर ज्यादा लोग होने की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रही थी। तभी फ्रैंकी की नजर उस पर पड़ी तो वो तुरंत उसके पास आया।

“अरे मैडम आप यहां क्या कर रही हैं। आपको तो मना किया था ना सर ने। आपने अपना डिसीजन बदल दिया क्या?” शोर होने की वजह से फ्रैंकी ने तेज आवाज में चिल्ला कर पूछा।

“बाद में बताऊंगी। पहले ये बताओ यहां क्या चल रहा है। यहां इतनी भीड़ क्यों है?” आयु ने उसी की तरह चिल्लाकर जवाब दिया।

“अरे मैडम ये भीड़ तो आपको महीने में एक बार जरूर देखने को मिलेगी। आज हमारे फाइट क्लब के रियल बॉस आए हुए हैं। बस जहान सर के साथ उन्हीं की रिंग फाइट चल रही है। टक्कर का मुकाबला है। आज का दिन ही अलग है।” फ्रैंकी ने बताया। बताते हुए वो काफी एक्साइटेड लग रहा था।

“अच्छा, मुझे लगा जहान ही यहां का रियल बॉस है। चलो मैं भी तो देखूं कौन है यहां का ओनर। क्या पता जहान ना माने तो मैं उसे खुद की ट्रेनिंग के लिए पटा लूं।” आयु ने कहा।

“आप एक बार के लिए भगवान जी को मना सकती है मैडम लेकिन फाइट क्लब के रियल बॉस को नहीं। यहां आई हर लड़की उन्हें पटाने के लिए अलग अलग तरह से ट्राई करती है पर वो तो किसी की तरफ पलट कर तक नहीं देखते। चलिए आइए आपको मिलवाता हूं।” फ्रैंकी ने जवाब दिया। भीड़ में अंदर जाने के लिए उसने आयु का हाथ पकड़ा।

कुछ ही देर में दोनों भीड़ को चीरते हुए आगे पहुंच चुके थे। जैसे ही आयु की नजरें रिंग में लड़ रहे वहां के रियल ऑनर पर गई तो वो तुरंत दूसरी तरफ पलट गई।

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