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Chapter 8

Tied with destiny - Chapter 8

Tied with destiny

गौरवी जी जबरदस्ती आरव को अनुष्का की शोक सभा में ले गई। वहां रुद्र और आयुष्का आने वाले लोगो को अटेंड करने के लिए पार्किंग एरिया से आगे खड़े थे। जैसे ही गाड़ी से आरव बाहर निकला, आयुष्का तुरंत दूसरी तरफ पलट गई।

“सोचा नहीं था तुम यहां तमाशा लगाने आओगे आरव खुराना। पता नहीं किस मकसद से तुम यहां आए हो। हाउ शेमलेस यू आर... तुम्हें एक बार भी खुद पर शर्म नहीं आई कि जिस लड़की को तुमने मारा, उसी की कंडोलेंस सेरेमनी में तुम शोक जताने आए हो।” आयु ने सोचा।

रूद्र से मिलने के बाद गौरवी जी, आरव और कबीर के साथ अंदर पहुंची। अंदर आते ही आरव की नजर अनुष्का की फोटो पर पड़ी।

उसकी फोटो देखने के बाद उसने सोचा, “वैसे तो मैं किसी के लिए सॉरी फील करता नहीं हूं लेकिन उस दिन तुमने मुझे बचाया था। तुम वहां नहीं होती तो मेरी इंपॉर्टेंट फाइल उस पुलिस वाले के हाथ लग जाती। आई विश जैसे तुमने मुझे बचाया था, वैसे ही मैं तुम्हें बचा सकता। ओके... किसी ने तो उस रात तुम्हे धकेला ही था। मैं इस बात का पता लगा लूंगा। आई होप अब तुम एक अच्छी जगह पर हो।” आरव ने मन ही मन उसके लिए प्रार्थना की।

कुछ देर उसकी फोटो देखने के बाद आरव ने एक नजर उसके परिवार पर डाली। वहां थोड़ी देर रुककर वो तीनों बाहर आ गए।

बाहर आते हुए आरव के पास किसी का कॉल आया तो वो पार्किंग एरिया में जाने के बजाय गार्डन की तरफ जाने लगा।

वही उससे बचने के लिए आयुष्का गार्डन में छुपी हुई थी। जब उसने आरव को उस तरफ आते देखा तो उसने खुद से बड़बड़ा कर कहा, “ये यहां क्यों आ रहा है? मैं इसके सामने नहीं आ सकती। आगर इसने आज मुझे यहां देख लिया तो फ्यूचर में मैं अपना काम नहीं कर पाऊंगी।”

आयुष्का ने नजरें नीची की और तेज कदमों से चलते हुए वापस पार्किंग एरिया की तरफ आने लगी। वही आरव किसी से कॉल पर बात कर रहा था। उसका ध्यान भी नीचे की तरफ था। आरव गलती से आयुष्का से टकरा गया तो वो नीचे गिर गई।

“देख कर नहीं चल सकती तुम?” आरव ने उसे गिरे हुए देखा तो सख्त आवाज में कहा।

आयु का चेहरा आरव के दूसरी तरफ था और उसने अपना फेस नीचे कर रखा था। “हां जैसे खुद तो बहुत देख कर चल रहा था।” आयु ने अपने मन में कहा। उसने एक नजर भी आरव की तरफ नहीं देखा और जल्दी से उठ कर चली गई।

“अजीब लड़की है। अपने किए के लिए सॉरी तक नहीं बोला। बाय गॉड मैंने आज से पहले इससे ज्यादा नाजुक लड़की नहीं देखी। छोटे से धक्के से नीचे गिर गई।” आरव ने आंख घुमाकर कहा और दूसरी तरफ चला गया।

आरव की बात सच थी। एक छोटे से धक्के से ही आयु नीचे गिर गई थी और उसे चोट आ गई थी। रूद्र ने उसे गिरते हुए देख लिया था। वो उसके पास गई तो रुद्र ने पूछा, “तुम ठीक हो ना? मैंने देखा तुम काफी तेजी से नीचे गिरी थी।”

“हां, मेरा ध्यान नहीं था। डोंट वरी आई एम फाइन।” आयु ने जवाब दिया।

“अपना ध्यान रखो।” रुद्र ने कैरिंग वे में कहा, जिस पर आयुष्का ने हां में सिर हिला दिया।

आयु ने आरव की आखिरी बातें सुन ली थी। उसे उसकी बातें बुरी लग रही थी। वो अपने कमरे में गई और गिरने की वजह से अपने घुटने पर लगी चोट को देखने लगी।

“सच ही तो कहा है उसने... मैं उस से टक्कर लेने का सोच रही हूं जबकि उसके एक छोटे से झटके ने मुझे गिरा दिया। तुम हमेशा से स्ट्रांग रही हो अनु, बाय बर्थ और मैं... पैदा होने के साथ ही मेरे ऊपर वीक होने का मार्क लग गया था।” आयु की आंखों में आंसू थे। वो और अनु ट्विंस थे, जिनमे आयु अनु से फिजिकल स्ट्रेंथ में वीक थी।

उसके जेहन में बचपन की कुछ यादें ताजा हो गई, जहां उसे वीक कहकर एक्स्ट्रा केयर की जाती थी। इसी वजह से आयु का बिहेवियर थोड़ा चिड़चिड़ा हो गया था और घरवालों से थोड़ी कम बनने लगी थी। सिर्फ अनु ही थी जिसके साथ वो खुलकर बात कर सकती थी, अपने दिल का हाल कह सकती थी पर अब वो भी इस दुनिया से जा चुकी थी।

आयु ने अपने आंसू पोंछे और खुद से कहा, “नहीं, मैं वीक नहीं हूं। अगर मैं तैयार नहीं हूं तो खुद को तैयार करूंगी तुम से लड़ने के लिए आरव खुराना। अगर मैंने कुछ करने का सोचा है तो वो करके ही दम लेती हूं और तुम्हारी नाक में दम नहीं कर दिया तो मेरा नाम भी आयुष्का सिंह ओबरॉय नहीं।”

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आयु ने अपनी चोट पर ऑइंटमेंट लगाया और बाहर आ गई। बाहर आकर उसने देखा आरव खुराना अपनी फैमिली के साथ वहां से जा चुका था।

आरव से लगे एक छोटे से झटके से आयु को उसकी फिजिकल स्ट्रैंथ का अंदाजा हो गया था और अब वो खुद को पूरी तरह तैयार करके ही उसके सामने जाना चाहती थी।

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अनुष्का की मौत को लगभग एक महीना बीत चुका था। सबकी जिंदगी फिर से चल पड़ी थी। इस बीच आयुष्का हॉस्पिटल इमरजेंसीज में इतनी बिजी हो गई थी कि उसे उससे हटकर आरव के खिलाफ सोचने तक का मौका नहीं मिल पा रहा था।

लंच ब्रेक में वो अपने केबिन में आई थी तभी एक नर्स तेज कदमों से चलती हुई उसके केबिन में आई।

“थैंक गॉड कोई तो डॉक्टर फ्री है। प्लीज आप मेरे साथ चलिए.. एक केस आया है और इस वक्त कोई भी फ्री नहीं है।” नर्स ने जल्दबाजी में कहा।

“ठीक है मैं आती हूं।” आयुष्का ने जवाब दिया और नर्स के साथ जनरल वॉर्ड में जाने लगी।

“मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी। थोड़ी देर बाद आप सर्जरी में भी असिस्ट करने वाली है पर कोई भी जूनियर डॉक्टर फ्री नहीं है। एक लड़का आया है उसे बहुत चोट लगी है। मैं कर देती पर मैंने नया ही ज्वाइन किया... मुझे थोड़ा अनकंफर्टेबल फील हो रहा था।” नर्स ने हिचकिचाते हुए बताया।

“कोई बात नहीं, कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है और हम डॉक्टर लोगों का इलाज करने के लिए ही बने हैं, चाहे छोटी चोट हो या बड़ी।” आयु ने पोलाइटली जवाब दिया।

दोनों कुछ ही देर में जनरल बोर्ड में पहुंच चुके थे। वहां एक लड़के को बुरी तरह पीटा गया था। उसे देखते ही आयु ने सिर हिलाकर कहा, “तुम... तुम यहां फिर से आ गए?”

“आप जानती हैं इसे?” नर्स ने आयु की तरफ देखकर पूछा।

“हां, ऑफ कोर्स जानती हूं। आप ऐसा कीजिए सिस्टर, सबसे पहले पुलिस को कॉल कीजिए।” बोलते हुए आयु उस लड़के को घूर कर देख रही थी। “और तुम, मैंने तुम्हें मना किया था ना कि आगे से इस हॉस्पिटल में मत आना।”

“सबसे पास में यही हॉस्पिटल है तो यही आना पड़ता है। वरना मुझे शौक नहीं है यहां का महंगा बिल देने का... और आप क्यों खाली फोकट पुलिस को इंवॉल्व कर रही हैं। मेरा इलाज करो ना, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।” उस लड़के ने कहा। वो शक्ल से काफी मासूम लग रहा था।

“पुलिस को कॉल करना है या नहीं?” नर्स अभी भी असमंजस की स्थिति में खड़ी आयु से पूछ रही थी।

“इस बार के लिए जाने दीजिए। अगली बार ये यहां दिखे तो पुलिस को कॉल कर दीजिएगा। आप फर्स्ट एड लेकर आइए, सबसे पहले इस के घाव साफ करने होंगे।” आयु के कहते ही नर्स तुरंत वहां से चली गई जबकि आयु अभी भी उसकी तरफ देख रही थी।

“ऐसे क्यों देख रही हो, प्यार हो गया है क्या मुझसे?” लड़के ने दर्द में भी हल्का मुस्कुरा कर कहा। वो लगभग 20 साल का था।

उसके ऐसा कहने पर आयु ने उसके हाथ पर हल्का सा मारा। “शर्म नहीं आती फ्रैंकी तुम्हें इलीगल फाइट करते हुए। गलती से भी पुलिस ने देख लिया तो तुम्हारे साथ साथ मेरी भी छुट्टी हो जाएगी।”

“पैसे की बहुत जरूरत रहती है अपन को... दिन में दो फाइट किए बिना गुजारा नहीं चलता, पता है ना आप को।” फ्रैंकी ने मायूस होकर जवाब दिया। नर्स के जाते ही वो आयु से काफी फ्रेंडली तरीके से बात करने लगा।

आयु ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और उसके पास बैठ गई। “मैंने तुम्हें बोला था तुम्हारी बहन को यहां शिफ्ट कर लेते हैं। उसका ट्रीटमेंट मैं देख लेती।”

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“बस भी करो। इतने महंगे हॉस्पिटल में मलहमपट्टी कराने के इतने पैसे ले लेते हैं जबकि मेरी बहन के तो दिल में छेद है। उस छेद के बिल को भरते भरते तो मेरी पूरी बॉडी में छेद हो जाएंगे, फिर भी मैं पैसे नहीं चुका पाऊंगा।” फ्रैंकी ने सिर हिलाकर कहा। तभी नर्स वहां आ गई तो आयु ने उससे बात करना बंद कर दिया।

वो नर्स के साथ मिलकर फ्रैंकी के घाव साफ कर रही थी। दर्द के मारे फ्रैंकी के मुंह से आह निकल गई।

“अब ऐसी आवाजें निकालने से कुछ नहीं होने वाला।” आयु ने उसके दवाई लगाते हुए कहा। “आगे से अपना ये टूटा हुआ चेहरा लेकर यहां मत आना।”

फ्रैंकी का फर्स्ट एड करने के बाद आयु ने कुछ मेडिसिंस लिखी और उसे नर्स को पकड़ाते हुए कहा, “इसमें कुछ पैन कीलर्स लिखी है मैने... आप इसे हॉस्पिटल के मेडिकल स्टोर से ला दीजिए। आई विल पे।”

नर्स आयु से पर्ची लेकर तुरंत वहां से चली गई। उसके जाते ही फ्रैंकी बोला, “इसकी क्या जरूरत थी डॉक्टर?”

आयु उसकी बात का कोई भी जवाब देती उससे पहले उसे कुछ सुझा। उसने फ्रैंकी से धीमी आवाज में कहा, “मेरे साथ मेरे केबिन में चलो। मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।”

फ्रैंकी पिछले कई महीनों से वहां ट्रीटमेंट के लिए आ रहा था। जब भी उसे चोट लगती वो यहीं आता था। अब तक आयु ने जब भी उसे वहां देखा, तब डांटा ही था। आज पहली बार वो उसे अपने साथ आने का कह रही थी।

“अपन ने बोल दिया है मैडम, अपने को कोई फ्री इलाज नहीं चाहिए। अपन अपनी बहन का इलाज करवा सकता है।” फ्रैंकी ने जवाब दिया।

“कोई एहसान नहीं कर रही, मुझे तुम्हारी हेल्प की जरूरत है। सबके सामने नहीं बोल सकती। तुम मेरे साथ चलो।” आयु ने इरिटेट होकर कहा।

फ्रैंकी ने उसकी बात पर हामी भरी और आयु के साथ उसके केबिन में आ गया। वहां आते ही आयु ने उसे चेयर पर बैठने का इशारा किया और खुद उसके पास वाली कुर्सी पर बैठ गई।

“अच्छा तुम मुझे बताओ कि तुम ये फाइट वगैरह कैसे करते हो और तुम्हें इसकी ट्रेनिंग कहां से मिली है?” वहां बैठते ही आयु ने पूछा।

“बस करो मैडम, आगे से यहां नहीं आऊंगा। तुम तो मुझे पुलिस के पास ले जाने का अच्छा खासा प्लान बना कर बैठी हो। बोल तो दिया मजबूरी में करना पड़ता है। अपन में इतनी ताकत है कि अपन अच्छे अच्छों को फाइट में हरा सकता है पर पैसों के लिए खुद हारना पड़ता है।” फ्रैंकी चिड़कर बोला।

उसकी बातें सुनकर आयु भी इरिटेट हो गई। उसने गुस्से में कहा, “इनफ नाउ...अगर तुम्हें पुलिस के हवाले करना होता तो अब तक कर चुकी होती। जो पूछ रही हूं उसका जवाब दो।”

“कहीं आपको तो रिंग में नहीं उतरना? ये आप के बस की बात नहीं है मैडम। आप बहुत नाजुक हो।” जैसे ही फ्रैंकी ने कहा आयु गुस्से में उसे बुरी तरह घूरने लगी।

फ्रैंकी उसके इस तरह देखने पर हड़बड़ा गया। उसने कहा, “मेरा मतलब है आपको तो बहुत ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी। हमारे यहां लड़कियों को भी ट्रेनिंग दी जाती है पर आप... आप उस टाइप की नहीं है। वो तो देखने में ही हट्टी कट्टी पहलवान नजर आती है... आप तो पतले से हो।”

“मुझे खुद को तैयार करना है ताकि आगे से मुझे कोई तुम्हारी तरह नाजुक या कमजोर कहकर ताना ना मार सके। अब मेरी बात गौर से सुनो। तुम मुझे अच्छी तरह ट्रेनिंग दोगे बदले में... बदले में तुम्हारी बहन के पूरे इलाज की जिम्मेदारी मेरी।” आयु ने सख्त आवाज में कहा।

आयु ने जो ऑफर रखा था उसके बाद फ्रैंकी ने तुरंत हां कर दिया। “ठीक है फिर आ जाना सुबह 6:00 बजे। एड्रेस अपन भेज देगा पर हां तेरी... मतलब आपकी जो भी हड्डी टूटेगी या.. मेरा मतलब फाइट में तो चोट लगती ही है ना मैडम, उसकी जिम्मेदारी आपकी खुद की होगी।”

आयु ने उसकी बात पर हामी भरी और उसे वहां से भेज दिया। उसके जाने के बाद उसके चेहरे पर हल्की स्माइल आ गई।

“चलो इतने दिनों में कुछ तो अच्छा हुआ। मैं तुम्हें अच्छे से जानती हूं फ्रैंकी, तुम अपनी बहन के इलाज के लिए खुद फाइट हार सकते हो तो मुझे ट्रेनिंग देने के लिए अपना दिन रात एक कर दोगे। बस हॉस्पिटल का थोड़ा सेटल करना होगा।” आयु ने खुद से कहा।

इतने दिनों में भले ही वो कितनी भी बिजी रही हो लेकिन आरव से बदला लेने की फीलिंग जो उसके दिल में थी, वो बिल्कुल भी कम नहीं हुई थी और अब तो उसने उसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी।

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