Tied with destiny - Chapter 13
Tied with destinyआयु ने आरव की गाड़ी पर डेंट दिया था उसका सारा इल्जाम अयान ने अपने सिर ले लिया। उसने जैसे तैसे आरव को कन्वेंस कर लिया था। आरव के वहां से जाने के बाद अयान गुस्से में आयु के केबिन में गया।
जैसे ही आयु ने उसे वहां देखा, वो झट से बोली, “लेट मी एक्सप्लेन फर्स्ट...”
“नो, आई डोंट नीड एनी एक्सप्लेनेशन।” अयान ने गुस्से में कहा, “मैंने तुमसे कहा था उनसे दूर रहना। सुबह मुझे लग भी रहा था कि तुम झूठ बोलकर यहां से जा रही हो। फिर तुमने अपनी ड्यूटी शिफ्ट करवाने का जो बहाना दिया, उससे मुझे लगा कि तुम आगे बढ़ रही हो। बट आई वॉज रॉन्ग। अभी भी समझा रहा हूं अपने कदम पीछे ले लो और ये उल्टी-सीधी हरकतें करना बंद करो। यू आर नॉट ए किड।” अयान ने अपने दिल की सारी भड़ास एक साथ निकाल दी।
“तुम्हें... तुम्हें कोई गलतफहमी हो रही है। मैं उससे कोई बदला नहीं ले रही। सुबह जब मैं जा रही थी, तो ट्रैफिक में फंस गई थी। मेरे पास उसकी गाड़ी खड़ी थी। पता नहीं मुझे अचानक क्या हो गया जो मैंने वो बेवकूफी कर दी। बाकी मेरे दिल में ऐसा कुछ नहीं है। मुझे सच... सच में मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है।” आयु ने अपनी तरफ से सफाई दी। वो बोलते हुए हड़बड़ा रही थी।
“मुझे कोई गलतफहमी नहीं हुई है। तुम बेवजह कुछ नहीं करती। पिछले काफी सालों से जानता हूं मैं तुम्हें...” अयान ने कहा। वो अपनी तरफ से आयु को समझाने की कोशिश कर रहा था। “उसे गए हुए एक महीना बीत चुका है। अब तक तुम्हें समझ आ जाना चाहिए कि वो वापस नहीं आएगी। तुम ही आगे बढ़ना होगा। रही बात आरव खुराना से बदला लेने की, तो ही इज इनोसेंट। उसने अनु को पुश नही किया होगा।”
हालांकि आयु को मन ही मन बहुत गुस्सा आ रहा था पर इस बार उस ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। वो चुप हो गई। जाने अनजाने में अयान ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था।
अयान उसके पास आया और उसे हग करके सहलाने लगा। “प्लीज ट्राय टू अंडरस्टैंड। तुम एक ब्रिलिएंट डॉक्टर हो। तुम्हारी एमडी कंप्लीट होने के बाद कुछ साल की प्रैक्टिस के बाद तुम सीनियर डॉक्टर की पोजीशन पर आ जाओगी। अगर इन सब में अपना दिमाग खराब करोगी तो तुम्हारा कैरियर बर्बाद हो जाएगा।”
आयु ने उसकी बात पर हामी भरी और उससे अलग हो गई। “मैं अपनी स्टडी पर फोकस करूंगी और कैरियर पर भी...”
अयान ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और कहा, “ठीक है फिर प्रॉमिस करो कि आज के बाद तुम्हारी जुबान पर कभी आरव खुराना का नाम नहीं आएगा।”
उसकी बात सुनकर आयु की नजरें झुक गई। उसने कुछ नहीं कहा तो अयान ने जबरदस्ती उसका हाथ पकड़कर अपने हाथ पर रख दिया।
“प्रॉमिस करो आयु...” अयान ने जोर देकर कहा तो जवाब में आयु ने हां में सिर हिला दिया।
आयु ने अपना हाथ उससे अलग किया और बातचीत का रुख बदलने के लिए कहा, “तुमने बताया नहीं, तुमने उससे कैसे डील की? वो इतनी आसानी से मान कैसे गया?” आयु को थोड़ी हैरानी हो रही थी क्योंकि अयान बहुत जल्दी आरव से मिलकर वापिस भी आ गया था।
“बस मैंने कर लिया हैंडल। मैंने उन्हें सॉरी कहा और बदले में उनकी गाड़ी का जो भी नुकसान हुआ है, वो पे करने के लिए कहा।” अयान ने जवाब दिया।
“और वो मान भी गया?” आयु ने फिर पूछा।
“हां मान गए। अब बार-बार तुम इस बारे में बात क्यों कर रही हो? आगे से ऐसी हरकत मत करना। मैं हर बार बचाने नहीं आ पाऊंगा। मैंने तुम्हारी नाइट ड्यूटी शिफ्ट करवा दी है। आई होप कि तुम ने जो कहा, तुम वही करो... ना कि कुछ और।” अयान ने स्ट्रिक्टली कहा।
“कुछ और करने का ऑप्शन ही कहां है? हमारे प्यारे सीईओ ने मुझे एज पनिशमेंट 3 घंटे एक्स्ट्रा ड्यूटी करने का कहा है। वो भी तो करना पड़ेगा।” आयु ने जवाब दिया, जिस पर अयान हल्का सा हंस दिया।
“तुम्हारे लिए ये पनिशमेंट जरूरी थी ताकि आगे से ऐसा कुछ भी करने का सोचो तो ये याद आ जाए। चलो, पनिशमेंट तुम्हें मिली है मुझे नहीं। मेरा घर जाने का टाइम हो गया है। कल सुबह मिलते हैं।” अयान ने आयु को बाय कहा और वहां से चला गया।
उसके जाने के बाद आयु अपनी चेयर पर बैठी और पानी पिया।
“क्या यार सब कुछ आज ही होना था? कितना कुछ करने का सोचा था और सब गड़बड़ हो गई। यहां आरव खुराना हॉस्पिटल पहुंच गया तो वहां जहान ने मुझे ट्रेनिंग देने से मना कर दिया। लगता है पूरी दुनिया मेरे खिलाफ हो गई है। डोंट वरी आयु, तुम अकेली ही काफी हो।” आयु खुद को मोटिवेट करने की कोशिश कर रही थी, तभी उसने टाइम देखा तो शाम के 6:00 बज रहे थे। इस टाइम उसकी ड्यूटी खत्म हो जाती थी पर मिस्टर कपूर ने उसे एक्स्ट्रा ड्यूटी करने के लिए भी कहा था।
“ऐसा करती हूं आज तो निकल जाती हूं। कल से एक्स्ट्रा ड्यूटी शुरू कर दूंगी।” सोचते हुए आयु ने अपना बैग उठाया और वहां से निकलने ही वाली थी कि एक नर्स उसके पास आई। उसके हाथ में एक पेपर था।
“ये मिस्टर कपूर ने भेजा है। आज से तीन महीने तक आप एक्स्ट्रा ड्यूटी करने वाली है। ये उसका शेड्यूल है।” नर्स ने उसे वो पेपर देते हुए कहा।
मजबूरन आयु को उस पेपर को लेना पड़ा। आज उसका दिन पूरा थका देने वाला था लेकिन फिर भी उसे मिस्टर कपूर के बताए अनुसार ड्यूटी पर जाना ही पड़ा।
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अयान से बात करने के बाद आरव हॉस्पिटल से बाहर निकला। कबीर उसका पार्किंग एरिया में वेट कर रहा था। जैसे ही आरव उसके पास पहुंचा, उसने गाड़ी का दरवाजा अनलॉक किया।
आरव गाड़ी में बैठ गया जबकि कबीर गाड़ी ड्राइव कर रहा था। कुछ देर तक उन दोनों के बीच चुप्पी छाई रही।
“ऐसे चुप मत रहो, मैं बोर हो रहा हूं।” आरव ने इरिटेट होकर कहा।
“आपने मुझे बाहर क्यों निकाला?” कबीर ने सबसे पहले यही पूछा।
“ओह तो तुम इस बात पर मुंह फुला कर बैठे हो? मैं उससे अकेले में बात करना चाहता था इसलिए तुम्हें बाहर भेजा था।” आरव ने जवाब दिया।
“हां तो उसी का कारण जानना चाहता हूं कि ऐसा क्या है, जो आप उससे अकेले में बात करना चाहते थे। आज से पहले तो ये नहीं हुआ। मैं आपके साथ हर एक मीटिंग में मौजूद था, फिर आज निकालने का कारण?” आरव का कबीर को यूं अयान के सामने बाहर जाने को कहना, उसे अच्छा नहीं लगा था।
आरव ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिर धीमी आवाज में कहा, “वो छवि सिंघानिया का छोटा बेटा है।”
उसकी बात सुनकर कबीर ने झटके से ब्रेक लगाए और आरव की तरफ देखने लगा। आरव ने उस समय उसे बाहर क्यों भेजा था उसका कारण उसे समझ आ गया।
“आप ठीक तो है?” कबीर के चेहरे पर थोड़ी देर पहले आरव के लिए गुस्सा था, वही गुस्सा अब फिक्र में बदल गया था।
आरव ने हां में सिर हिलाया और हल्के से मुस्कुरा कर कहा, “डोंट वरी... हमें एक दूसरे से प्रोब्लम नही है।” उसकी आवाज में मायूसी थी, जिसे वो अपनी स्माइल के पीछे छुपाने की कोशिश कर रहा था।
कबीर ने फिर से गाड़ी स्टार्ट की। “फिर तो आप परसो रात की पार्टी मिस नहीं करेंगे।” कबीर ने मुस्कुरा हुए पूछा।
“बिल्कुल भी नहीं...” आरव ने इविल स्माइल के साथ जवाब दिया। “आफ्टर ऑल वो दिन किसी के लिए बहुत बड़ा है और मेरी पूरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं उसके उस बड़े दिन को खराब करूं। गिफ्ट की तैयारी कर ली है ना तुमने?”
“हां जरूर...” कबीर ने जवाब दिया।
परसों रात की पार्टी उनके लिए बहुत खास होने वाली थी और आरव ने उसे खराब करने का प्लान पहले ही बना रखा था। आरव और कबीर वहां से सीधे घर जाने के लिए निकल गए।
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रात के 10:00 बज रहे थे। आयु ने अपनी एक्स्ट्रा ड्यूटी खत्म की, तब तक काफी देर हो गई थी। एक्स्ट्रा आर्स की ड्यूटी निपटाने के बाद आयु हॉस्पिटल से बाहर निकली।
“पक्का ये कपूर मुझसे बदला ले रहा है। अरे एक गाड़ी ही तो खराब की थी यार, पैसे दे देती। ना जाने क्यों इतना हंगामा किया। जनरल वॉर्ड में ड्यूटी करना कितना मुश्किल होता है। लोग गलती से मुसीबत में पड़ जाते हैं लेकिन यू नो व्हाट आयुष्का सिंह ओबरॉय, तुमने जानबूझकर ऐसी गलतियां की, जिससे तुम मुसीबत में आ गई हो। मुझे क्या पता था वो जहान मुझे ट्रेनिंग देने से मना कर देगा। खामखा नाइट ड्यूटी करवा ली। रात में तो ज्यादा पेशेंट भी नहीं आते। अब तो मैं ठीक से सो भी नहीं पाऊंगी। ओ गॉड, ये क्या चल रहा है मेरी लाइफ में...” आयु बड़बड़ाते हुए पार्किंग एरिया की तरफ जा रही थी। चलते हुए वो अपनी गर्दन दबा रही थी।
वो पार्किंग एरिया के पास पहुंची ही थी कि तभी एक गाड़ी तेज गति से उसके पास आई और रुक गई।
“हद है... अभी मेरी जान ले लेता ये तो..।” आयु गुस्से में गाड़ी के पास गई और विंडो खटखटा कर कह, “हॉस्पिटल में एक्सीडेंट करने का इरादा है क्या तुम्हारा? गाड़ी चलानी नही आती, तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज किया करो ना...”
तभी गाड़ी की विंडो ओपन हुई। वहां बैठे शख्स को देख कर आयु हैरान रह गई। उसने उस शख्स के वहां होने और उससे मिलने की उम्मीद तो बिल्कुल नहीं की थी।
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