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Chapter 7

Tied with destiny - Chapter 7

Tied with destiny

आरव ने गौरवी जी का दिल रखने के लिए उन्हें लड़कियों के मामले में अपनी चॉइस के बारे में कुछ भी बता दिया। वही उसकी बातों को सीरियसली लेते हुए गौरवी जी अपने कमरे में लैपटॉप के साथ बैठी थी।

वो उसमे कुछ सर्च कर रही थी। लैपटॉप स्क्रीन पर काफी सारी लड़कियों की पिक्चर्स निकली हुई थी, जिनकी आंखें एम्बर शेड में थी।

उन सबको देखते हुए गौरवी जी ने बड़बड़ाकर कहा, “बाकी फीचर्स भी बता देता तो ढूंढने में प्रोब्लम नही होती। सिर्फ आंखों का कलर देखकर किसी को कैसे प्यार हो सकता है। अगर आंखों का रंग देखकर ही प्यार होता तो आरव अब तक सिंगल नहीं होता... उसकी ब्लू आईज कितनी प्यारी हैं।”

स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए अचानक वहां अनुष्का की फोटो आई, जिसकी आंखें ठीक वैसी ही थी, जैसे आरव ने बताई थी।

“अनुष्का सिंह ओबेरॉय...” गौरवी जी उसे गौर से देखने लगी। तभी उनकी नजर रिसेंट न्यूज़ पर गई। वो हैरानी से बोली, “ये... ये इसकी डेथ कब हुई? यूट्यूब पर सामने वीडियोज आए, तो मुझे लगा वो फेक होगे। बेचारी इतनी कम उम्र में चल बसी। कितनी खूबसूरत है। मुझे तो इसकी आने वाली फिल्म का बेसब्री से इंतजार था और अब देखो क्या हो गया।”

गौरवी जी अनुष्का की मौत की न्यूज उदास हो गई। उन्होंने उसकी मौत का कारण जानने के लिए एक न्यूज़ पर क्लिक किया, तब उन्हें आरव और अनुष्का की किस करते हुए पिक्चर्स देखी। उसमें आरव का नाम भी लिखा था। उसे देखने के बाद वो चौक गई।

“आरव का अनुष्का सिंह ओबेरॉय के साथ क्या रिलेशन है? अगर ये उसकी गर्लफ्रेंड है तो उसकी मौत के बाद भी उसके चेहरे पर शिकन की एक लाइन भी नहीं... चल क्या रहा है तुम्हारी लाइफ में आरव।”

उन सब चीजों को देखने के बाद गौरवी जी और भी उलझन में आ गई और उन्होंने सुबह सबसे पहले आरव से बात करने का सोचा। उन्होंने टेबलेट को बेड साइड पर रखा और उसके बाद कुछ दवाइयां ली। लाइट ऑफ करके वो सोने की कोशिश करने लगी।

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मंथन से मिलने के बाद आयुष्का घर लौटी तब सुबह के 3:00 बज रहे थे। घर पर सब सो चुके थे तो वो दबे पांव अंदर आई और सीधे अपने कमरे में चली गई।

मंथन के हेल्प ना करने की वजह से वो अपसेट थी।

“कोई मेरी हेल्प करें या ना करें पर मुझे जो करना है वो मैं करके रहूंगी। हर तरह से खुद को स्ट्रांग बनाऊंगी ताकि जिस दिन तुमसे सामना हो, उस दिन तुम्हारा अच्छे से मुकाबला कर सकूं आरव खुराना।” आयुष्का ने अपने मन में कहा।

चेंज करने के बाद आयुष्का बेड पर थी। उसके हाथ में उसका लैपटॉप था। ट्रैवलिंग के बाद वो बहुत थक गई थी। फिर भी आराम करने के बजाय वो आरव के बारे में सर्च करने लगी।

“कभी सोचा नहीं था कि अपनी जिंदगी से हटकर किसी और चीज पर ध्यान दूंगी खासकर तुम जैसे लोगों पर। बट लाइफ में कब क्या हो जाए किसे पता चलता है।” खुद से बातें करते हुए आयुष्का लैपटॉप स्क्रीन को देख रही थी। वहां आरव और अनुष्का की पिक्चर साथ देख कर उसकी आंखें नम हो गई।

“कम ऑन आयु... यू कांट गिव अप। अभी तो बस शुरुवात है। आगे ना जाने क्या कुछ झेलना पड़ेगा।” आयुष्का ने अपने गुस्से को शांत करने के लिए गहरी सांस लेकर छोड़ी।

आरव की पर्सनल लाइफ से जुड़ा ज्यादा कुछ उसे मिला नही। ऑनलाइन डेटा के हिसाब से उसके बिजनेस और पार्टी लाइफ के विडियोज थे। काफी सारी न्यूज नेटवर्क पर उसके अलग अलग लड़कियों के साथ साथ रिलेशन होने के बारे में लिखा गया था। इन शॉर्ट उसे आरव के बारे में उसके सक्सेसफुल बिजनेसमैन होने के अलावा कुछ भी अच्छा पढ़ने को नही मिला।

आयुष्का ने लैपटॉप की स्क्रीन बंद की। उसके चेहरे पर गुस्सा था। वो बेड पर लेट गई और आरव के बारे में सोचने लगी, “लगा भी था कि तुम कोई अच्छे इंसान तो होने वाले हो नहीं... लेकिन ये उम्मीद भी नहीं की थी। मेरी बहन के अलावा तुमने ना जाने कितनी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद की होगी। पर एक बात मुझे अभी भी समझ नहीं आ रही। उस रात अनु मुझसे कॉल पर बात कर रही थी। वो मंथन से प्यार करती है तो फिर आरव खुराना को किस क्यों करेगी? इस बात को मैं अच्छे से जानती हूं कि उसे मंथन के अलावा किसी और के बारे में सोचा तक नहीं था। अपने प्यार को लेकर पूरी तरह क्लीयर थी, फिर बीच में ये आरव खुराना कहां से आ गया? इस का जवाब तो अब वही दे सकता है। मुझे आरव खुराना तक पहुंचने के लिए कुछ ना कुछ करना होगा।” सोचते हुए उसे नींद आ गई थी।

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अगली सुबह अलार्म बजने के साथ आयुष्का की आंख खुली। सुबह के 7:00 बज रहे थे। सुबह के लगभग 9 बजे के करीब वो रोज हॉस्पिटल अपनी ड्यूटी पर जाती थी।

आयुष्का तैयार होकर बाहर आई तो उसने देखा कि उसके घर पर अनुष्का के कंडोलेंस सेरेमनी की तैयारी चल रही थी। आज के दिन ज्यादातर रिश्तेदार और अनुष्का से जुड़े हुए लोग उनके घर सांत्वना प्रकट करने के लिए आने वाले थे।

उसे हॉस्पिटल के लिए तैयार हुआ देखकर तारा जी ने उसके पास आकर कहा, “रियली आयु, तुम आज भी काम पर जाना चाहती हो। मुझे समझ नहीं आ रहा तुम्हें उसके जाने का दुख है भी या नहीं?”

“ये मुझे आपको बताने की जरूरत नहीं है मॉम। मुझे नहीं पता था आज कंडोलेंस सेरेमनी है।” आयु ने बिना किसी भाव के जवाब दिया।

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“हां तो पता होने के लिए घर पर मौजूद होना भी जरूरी होता है। कल रात तुम डिनर टेबल पर नहीं थी। ऊपर से पार्टी करके दबे पांव जब घर पर आई थी, तब तुम्हें क्या लगा था मुझे पता नहीं चलेगा।” तारा जी ने सिर हिलाकर कहा। उनकी आयु से कुछ खास नहीं बनती थी।

“फर्स्ट एड ऑल मैं पार्टी करके नहीं आ रही थी। आप सब लोग जाग ना जाए इसलिए मैं दबे पांव घर पर आई थी। मैं एक डॉक्टर हूं मॉम, हॉस्पिटल में इमरजेंसी हो सकती है।” आयुष्का ने उन्हें झूठ बोला। उसके दिल में आरव के लिए जो बदले की भावना पनप रही थी, वो उसे किसी के सामने जाहिर नहीं करना चाहती थी।

“इमरजेंसी हो सकती है पर हुई नहीं। मैंने हॉस्पिटल कॉल किया था। कल तुम एक बार भी वहां नहीं गई। खैर छोड़ो, मुझे इस टाइम तुमसे बहस करके अपना मूड खराब नहीं करना, वो ऑलरेडी खराब है। मैं नहीं चाहती बाकी लोगों को ये कहने का मौका मिले कि तुम्हें अनु की मौत का कोई फर्क नहीं पड़ता। जाओ और जाकर चेंज करके आओ।” तारा जी ने सख्त आवाज में कहा।

आयु ने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और कमरे में चली गई। उसने अपनी ड्रेस चेंज करके वाइट कलर का सूट पहन लिया था।

कुछ ही देर में कंडोलेंस सेरेमनी के लिए गेस्ट आने शुरू हो गए थे। आयु अपनी फैमिली के साथ मौजूद थी।

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मंथन सुबह सुबह नहा कर अपने कमरे से बाहर आया और टीवी स्क्रीन पर अनुष्का की मूवी लगाकर बैठ गया। रात को आयु से मिलने के बाद मंथन उसे बारे में भूल चुका था। अनु के जाने के बाद वो अब तक अपने कमरे से बाहर नहीं आया था।

“तुम्हें अपनी ये मूवी कुछ खास ही पसंद थी। शायद इसने बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कलेक्शन किया था इस वजह से और इसके बाद से ही तुम्हें नेम और फेम मिली थी।” मूवी देखते हुए मंथन धीरे से बुदबुदाया।

उसका पूरा ध्यान अनुष्का को देखने में था तभी उसके कमरे पर किसी ने नॉक किया। बाहर न जाने की वजह से उसका खाना अंदर ही आता था। उसे लगा घर का हाउस हेल्पर आया होगा। ये सोचकर उसने टीवी स्क्रीन को बंद किया और उठकर दरवाजे पर गया।

उसने दरवाजा खोला तो सामने नाश्ते की प्लेट के साथ साक्षी खड़ी थी। “कब तक खुद को बिना किसी गलती की सजा देते रहोगे।” साक्षी ने कहा और उसे साइड करके अंदर आ गई।

“मुझे कुछ दिनों के लिए अकेला रहना है दी।” मंथन अभी तक दरवाजे पर खड़ा था।

“लेकिन मुझे तुम्हें अकेला नहीं छोड़ना है। तुम्हारे अकेले रहने से वो वापस नहीं आ जाएगी।” बात करते हुए साक्षी ब्रेकफास्ट सर्व करने लगी। “चलो आओ, साथ में ब्रेकफास्ट करते हैं।”

मंथन साक्षी के बहुत क्लोज था इसलिए वो उसे मना नहीं कर पाया। वो उसके पास जाकर बैठ गया और चुपचाप नाश्ता करने लगा।

“वो लड़की कौन थी जो कल रात आई थी?” अचानक साक्षी ने पूछा।

“वो अनु की ट्विन सिस्टर है। न जाने क्या बकवास कर रही थी। मैंने उसकी बात की तरफ ज्यादा नोटिस नहीं किया और उसे वापस भेज दिया। आप भी ज्यादा ध्यान मत दो।” मंथन ने थोड़ी लापरवाही से जवाब दिया।

“वो तुमसे मिलने यहां तक क्यों आई थी? आई मीन वो मुंबई में रहती है और सिर्फ एक छोटी सी मीटिंग के लिए दिल्ली तक आ गई, वो भी सीएम निवास में। ये छोटी बात नहीं होती।”

“अनु ने मुझे उसके बारे में बताया था। वो थोड़ी चाइल्डिश है। अनु के जाने के बाद मैंने रिएक्ट नहीं किया तो मुझे जवाब लेने यहां तक आ गई।” मंथन ने उसे आधी अधूरी बातें बता दी ताकि वो इस तरफ ज्यादा ध्यान ना दें।

“तब तो सच में पागल ही है।” साक्षी ने जवाब दिया। वो मंथन की तरफ देख रही थी।

नाश्ता हो जाने के बाद मंथन ने कहा, “दी प्लीज बाहर सब संभाल लीजिएगा। जब तक मैं थोड़ा टाइम खुद के साथ नहीं बिताऊंगा, मुझे कुछ नहीं होगा। उसे भूल पाना मेरे लिए आसान नहीं है।”

साक्षी ट्रे के साथ खड़ी हुई और मंथन का कंधा सहला कर कहा, “ठीक है मैं देख लूंगी। तुम अनु की बहन का एक बार पता कर लेना। कहीं वो अपने पागलपन में कुछ गड़बड़ ना कर दें।”

“मैंने उसके पीछे अपने किसी आदमी को लगाया है। वो उसका देख लेगा।” मंथन ने जवाब दिया।

साक्षी ने मुस्कुरा कर हां में सिर्फ हिलाया और वहां से जाने लगी। उसने जाते वक्त एक नजर मंथन की तरफ देखकर सोचा, “तो मैं सही थी। वो लड़की तुम्हें अफेक्ट करती है क्योंकि वो अनु से जुड़ी हुई है। मुझे कैसे भी करके उससे बात करनी होगी और तुम्हें फिर से पहले जैसा बनने में उसकी हेल्प लेनी होगी।”

साक्षी वहां से चली गई तो मंथन ने उसके जाने के बाद फिर से टीवी स्क्रीन को ऑन किया और मूवी देखने में लग गया।

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अगली सुबह गौरवी जी अपने सवालों के साथ आरव का डाइनिंग टेबल पर इंतजार कर रही थी। कबीर भी उन्हीं के घर पर रहता था। वो गौरवी जी के साथ ब्रेकफास्ट टेबल पर मौजूद था जबकि आरव अब तक आया नहीं था।

गौरवी जी के चेहरे के भावों को पढ़ते हुए कबीर ने पूछा, “रात को आप उनसे बात करने गई थी। आप दोनों के बीच के नाराजगी खत्म नहीं हुई क्या, जो आप परेशान लग रही है?”

“जब तक सांसे चल रही है तब तक आरव को लेकर मेरी परेशानी कभी खत्म होने वाली लगती नहीं।” गौरवी जी ने जवाब दिया।

आरव सीढियों से नीचे आ रहा था तब उन्होंने गौरवी जी की बात सुन ली थी। उसने आंखे घुमाई और चेयर पर आकर बैठ गया।

“दादी, मैं बच्चा नहीं हूं, जो आप मेरे लिए परेशान हो रही है।” बोलते हुए आरव अपनी प्लेट में खाना डालने लगा।

“हां वही तो मैं कह रही है... अब तू बच्चा नहीं है। तू खुद बच्चे पैदा कर सकता है।” जैसे ही गौरवी जी ने कहा आरव और कबीर खांसने लगे। गौरवी ने आगे कहा, “पानी पियो दोनो.. और तू बता आरव.. तेरा अनुष्का सिंह ओबेरॉय से क्या रिलेशन है?”

“कौन अनुष्का सिंह ओबेरॉय?” आरव ने पूछा। वो तो उसका अनुष्का का नाम तक भूल गया था।

कबीर ने बात को संभालते हुए कहा, “दादी आप उस एक्ट्रेस अनुष्का सिंह ओबेरॉय की बात क्यों कर रही है? मैने सुना, वो अब इस दुनिया में नही रही।” कबीर ने एक्ट्रेस शब्द पर जानबूझकर जोर दिया ताकि आरव को याद आ जाए।

“अच्छा वो... हां मुझे भी बहुत दुख हुआ।” आरव ने कबीर की तरफ देखकर कहा।

“अच्छा? और इस दुख की वजह? तुझे तो किसी के कुछ भी होने से फर्क नहीं पड़ता। सच बता तेरा उससे अफेयर था ना... मैने तुम दोनो की पिक्चर्स देखी थी। तुम उसे किस कर रहे थे।” गौरवी जी ने आरव को घूरते हुए कहा।

“अरे दादी फेक न्यूज होगी। आप को याद हो तो कल रात भी आप उसी तरह की कोई न्यूज़ देख रही थी।” आरव ने कहा।

“ओह तो वो वीडियो दादी का ध्यान भटकाने के लिए था। ताकि दादी गलती से भी अनुष्का के साथ आरव की पिक्चर्स या वीडियो देख ले तो उन्हें सफाई ना देनी पड़ी।” कबीर ने आरव की तरफ देखकर सोचा।

“मुझे सच में सुनकर बुरा लगा दादी... अब मैं इतना भी इनसेंसिटिव नही हूं।” आरव ने खाते हुए कहा।

“ठीक है फिर चलते है।” गौरवी जी तुरंत खड़ी हुई। “आज उसकी कंडोलेंस सेरेमनी है। वहां जाकर दुख प्रकट करते है।”

अपनी बात कहकर गौरवी जी अपने कमरे मे जाने लगी। आरव पीछे से चिल्लाया, “न... नो दादी। आई हैव मीटिंग्स... ऊपर से आप जानते हो ना, मैं ऐसी जगह नहीं जाता। हमारा तो उनसे कोई लेना देना भी नही है।”

जब तक गौरवी जी अपने कमरे के दरवाजे तक नहीं पहुंच गई आरव उन्हें ना जाने के अलग अलग बहाने दे रहा था।

अपने कमरे के दरवाजे पर पहुंचकर गौरवी जी आरव की तरफ पलटी और तेज आवाज में कहा, “जय सिंह ओबेरॉय, उस के पापा, उनकी कंपनी में हमारे भी शेयर्स है। उसकी मां तारा सिंह ओबेरॉय तुम्हारे डैड की फ्रेंड थी। इतने रिश्ते नाते काफी है या और गिनाऊं? जाकर चेंज करो।” आरव को ऑर्डर देकर गौरवी जी अंदर चली गई।

वही आरव ने अपना सिर पकड़ लिया। “ये दादी सबसे रिश्ते निकाल कैसे लेती है।”

“जाना तो पड़ेगा ही... आफ्टर ऑल दादी का ऑर्डर है।” कबीर ने कंधे उचका कर कहा।

आरव ने उसकी बात पर हामी भरी और चेंज करने चला गया। उसने व्हाइट कस्टम मेड सूट पहना था और आंखों पर ब्लैक गॉगल्स लगाए थे।

गौरवी जी ने व्हाइट साड़ी तो कबीर ने कुर्ते पजामे पहने थे। आरव को इतना तैयार हुआ देखकर गौरवी जी ने कबीर से फुसफुसा कर कहा, “तैयार तो ऐसे होकर आया है, जैसे रिश्ता देखने जा रहे है।”

उनकी बात सुनकर कबीर की हंसी छूट गई। आरव ने उन दोनो को देखकर कहा, “मुझे लिप रीडिंग आती है... सो डोंट ट्राई टू बी स्मार्ट।”

कबीर ने तुरंत अपने चेहरे के भावों को सामान्य किया और आरव के साथ आगे की सीट पर बैठा। वो गाड़ी ड्राइव कर रहा था जबकि गौरवी जी पीछे बैठी थी। कुछ ही देर में वो ओबरॉय मेंशन पहुंच चुके थे, जहां दरवाजे पर आयुष्का अपने भाई रुद्र के साथ आने वाले गेस्ट को अटेंड कर रही थी।

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