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Chapter 14

Tied with destiny - Chapter 14

Tied with destiny

हॉस्पिटल में एक्स्ट्रा ड्यूटी करने के बाद आयु वहां से बाहर निकली तभी एक गाड़ी तेज गति से उसके पास आई और रुक गई। आयु ने गाड़ी के पास जाकर उसकी विंडो खटखटाई तो ड्राइविंग सीट पर बैठे शख्स ने विंडो ओपन खोला।

सामने मौजूद शख्स को देखकर आयु ने हैरानी से कहा, “तुम यहां क्या कर रहे हो और तुम्हें कैसे पता कि मैं यहां काम करती हूं मंथन?”

“गाड़ी में बैठो।” मंथन ने उसकी बात का जवाब देने के बजाय गाड़ी में बैठने के लिए कहा।

“पर मेरे पास खुद की कार है। मुझे घर भी जाना है। ऑलरेडी मैं लेट हो चुकी हूं।” आयु ने गाड़ी में बैठने से मना कर दिया।

उसके मना करने पर मंथन ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और उसकी तरफ देखकर शांत लहजे में कहा, “तुम्हें हर बात पर बहस करना जरूरी है क्या? तुम्हारी गाड़ी यहां से कोई चोरी करके नहीं ले जाएगा। जो कहा है उतना करो।”

इस बार आयु ने कुछ नहीं कहा और मंथन के पास वाली सीट पर आकर बैठ गई। उसके बैठते ही मंथन ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा, “ड्रॉर खोलो। वहां तुम्हारे लिए कुछ रखा है। वो ले लो।”

आयु उसकी तरफ हैरानी से देखने लगी। मंथन का अचानक वहां आना और फिर उसे कहीं लेकर जाना, ये सब उसके मन में काफी सारे सवाल पैदा कर रहे थे।

“मैं गाड़ी में बैठ गई हूं, अब तो मेरे सवालों के जवाब दे दो। तुम यहां क्यों आए हो? और हम कहां जा रहे हैं?” आयु ने फिर पूछा।

“हम मेरे फ्लैट पर चल रहे हैं। घर पर कॉल करके बोल दो कि तुम आज रात घर नहीं आओगी।” मंथन ने जवाब दिया। वो उसे ऑर्डर देने के वे में बात कर रहा था।

“और मैं तुम्हारे साथ क्यों चलूं? तुम तो मुझ पर ऐसे ऑर्डर झाड़ रहे हो जैसे मैं तुम्हारी सर्वेंट हूं। चुपचाप गाड़ी रोको, मुझे तुम्हारे साथ कहीं नहीं जाना है।” आयु ने हल्के गुस्से में कहा।

“तुम्हें फाइट क्लब नहीं जाना चाहिए था। वो जगह तुम जैसे लोगों के लिए बिल्कुल नहीं बनी है।” जैसे ही मंथन ने फाइट क्लब में जाने की बात कही, आयु ने उसकी तरफ घूर कर देखा।

“अच्छा तो तुम मेरी जासूसी करवा रहे हो?” आयु ने सिर हिला कर कहा। “हां तो? मैं गई थी फाइट क्लब, तुम तो कुछ कर नहीं रहे हो। मुझे तो करना ही होगा ना.... यू नो व्हाट मंथन आहूजा यू आर ए फेक पर्सन। आई डोंट नो मेरी बहन ने क्या सोचकर तुमसे प्यार किया था बट तुम उसके लायक बिल्कुल नहीं हो। तुम यहां इसलिए आए हो ना ताकि मुझे डरा धमका सको।” आयु गुस्से में मंथन को लगातार सुनाए जा रही थी।

उसकी बातें सुनकर मंथन को भी गुस्सा आ रहा था। उसने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी। वो काफी रैश ड्राइविंग कर रहा था।

“गाड़ी रोको... इस तरह गाड़ी मत चलाओ, हमारा एक्सीडेंट हो जाएगा। हम बिजी रोड पर है।” उनकी गाड़ी लगभग किसी गाड़ी से टकराने ही वाली थी कि आयु ने मंथन का हाथ पकड़ा। मंथन ने जल्दी से ब्रेक लगाए और एक झटके के साथ गाड़ी रुक गई।

गाड़ी रुकते ही मंथन ने आयु का हाथ अपने हाथ से अलग कर दिया। उसने आयु की तरफ गुस्से में देखा और सख्त लहजे में कहा, “आगे से मुझे टच मत करना। हां करवा रहा था तुम्हारी जासूसी क्योंकि तुम.... तुम बेवकूफियां कर रही हो। मेरी जगह अनु होती तो वो भी तुम्हें रोकती। मुझे बताओ तुम क्या चाहती हो? आई विल हेल्प यू आउट बट प्रॉमिस करो कि तुम इन सब से दूर रहोगी।”

“ये तो इंपॉसिबल है। तुम्हें मेरी हेल्प करनी है तो करो वरना मुझे कोई जरूरत नहीं है किसी की हेल्प की....” आयु ने रुडली जवाब दिया।

“मेरे घर चलकर आराम से बात करते हैं। वहां जाने से पहले ड्रॉर में लैंसेस पड़े हैं वो निकाल कर लगा लो। आई डोंट वांट टू सी योर आइज।” मंथन ने ड्रॉर खोलकर लैंसेस निकले और आयु के हाथ में थमा दिए।

“डिस्गस्टिंग...।” आयु ने सिर हिलाया, “कल को तो तुम मेरी आंखें निकलवा दोगे क्योंकि वो अनु जैसी लगती है।” कहते हुए आयु ने लैंसेस का बॉक्स गाड़ी से बाहर फेंक दिया। उसकी इस हरकत पर मंथन उसे गुस्से में देख रहा था।

“मुझे ऐसे मत देखो। जब भी मैं अपनी आंखों को देखती हूं तो मुझे ये एहसास होता है वो मेरे अंदर है, आज भी मेरी आंखों में वो कहीं ना कहीं जिंदा है। तुम मेरी हेल्प कर रहे हो इसका मतलब ये नही मैं तुम्हारे सारे ऑर्डर्स फॉलो करूंगी।” आयु ने लैंसेस फेकने का कारण बताया।

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मंथन ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। वो सामने देखकर गाड़ी चला रहा था। उसके मन में काफी कुछ चल रहा था।

“जो एहसास तुम्हें होता है, मैं नहीं चाहता कि वही एहसास मुझे फील हो। तुम्हारी आंखों में देखता हूं, तो मुझे भी यही लगता है कि एक पल के लिए अनु मेरे सामने आ गई है। मुझे खुद की फिलिंग्स को कंट्रोल करना होगा।” मंथन ने अपने मन में सोचा।

बाकी के रास्ते में उन दोनों ने कोई बात नहीं की। लगभग दो घंटे बाद वो साउथ बॉम्बे के एक लग्जरियस अपार्टमेंट के आगे थे। मंथन ने गाड़ी पार्क की ओर उसे वहां से अपने फ्लैट में लेकर गया। वो फ्लैट भी काफी बड़ा और खूबसूरत था।

वहां आते ही आयु फ्लैट को नजरे घुमाकर देख रही थी जबकि मंथन ने अंदर आते ही तेज आवाज में कहा, “साक्षी दी... दी वो आ गई है।”

मंथन के आवाज लगाने पर साक्षी बाहर निकाल कर आई। उसके आने पर आयु ने उसे देखा। वो लगभग उसी की हाइट की थी। गेरुआ रंग, मीडियम लेंथ के स्ट्रेट हेयर और जींस के ऊपर कुर्ता पहने हुए साक्षी का लुक काफी प्रोफेशनल लग रहा था।

बाहर आते ही साक्षी ने भी आयु की तरफ गौर से देखा। फिर उसकी नजर उसकी आंखों पर गई तो उसने एक नजर फिर मंथन की तरफ देखा।

“दी ये अनु की छोटी बहन है।” मंथन ने साक्षी को बताया और फिर आयु की तरफ देखकर कहा, “और ये मेरी बड़ी बहन साक्षी है।”

आयु ने मुस्कुरा कर साक्षी को हेलो कहा। फॉर्मल इंट्रोडक्शन होने के बाद वो तीनों घर के लिविंग रूम में बैठे थे।

वहां आते ही मंथन बोला, “आई होप दी आप इसे बेहतर तरीके से समझा पाए। इसे लगता है कि अनु की डेथ एक्सीडेंटल नहीं थी। उसे किसी ने टेरिस की छत से धक्का दिया था और ये उस इंसान से बदला लेना चाहती हैं।” मंथन साक्षी की तरफ देखकर बात कर रहा था।

“हां तो इसमें गलत क्या है? जिस शख्स ने मेरी बहन को धक्का दिया है, वो कैसा है ये पूरा मुंबई जानती हैं। एक नंबर का कैसेनोवा इंसान है वो... अपने फायदे के लिए दूसरों को यूज करने वाला। पता नहीं मेरी बहन उसके जाल में कैसे फंस गई। मुझे पूरी बातों का नहीं पता है पर इतना यकीन है एक दिन मैं सब सच जान लूंगी और उस इंसान को उसके किए की सजा जरूर दिलवाऊंगी।” आयु का गुस्सा उसके शब्दों के जरिए बाहर आ रहा था।

“और यहां तुम किस शख्स की बात कर रही हो?” साक्षी ने हैरानी से पूछा। आयु ने अब तक आरव का नाम नहीं लिया था।

“वही इंसान, जिसके साथ उसका वीडियो वायरल हुआ था। वो वीडियो... मुझे नहीं पता उसमें जो दिख रहा था, वो रियल है या वो भी फेक था लेकिन आखिरी वक्त वो उसी के साथ थी....” आयु साक्षी को आरव के बारे में बता रही थी, तभी साक्षी ने उसकी बात बीच में काटकर कहा, “मंथन... कहीं ये आरव की बात तो नहीं कर रही?”

मंथन ने हां में सिर हिलाया। साक्षी ने फिर आयु की तरफ देखकर कहा, “तुम्हें कोई गलतफहमी हो गई होगी। वो ऐसा नहीं करेगा।”

“अरे आप जानती ही कितना हो उस इंसान को.... और आप तो इस तरह बात कर रही हो जैसे उसे अच्छे से जानती....” आयु बोलते हुए रुक गई। उसने साक्षी के चेहरे की तरफ देखा, जिसने पलकें झपका कर उसकी बात पर हामी भरी।

“साक्षी दी और आरव स्कूल टाइम फ्रेंड्स है।” मंथन ने बताया।

“अच्छा तो इसीलिए तुम उसके खिलाफ कुछ कर नहीं रहे। तुम्हारी बातों से साफ है कि तुम भी उसे अच्छे से जानते हो। लगता है मैं गलत टाइम पर दो गलत इंसानों के सामने बैठी हूं।” आयु उठकर वहां से जाने लगी, तभी साक्षी जल्दी से खड़ी हुई और उसका हाथ पकड़ कर उसे रोका।

“वो वीडियो मैंने भी देखा था और तुम आरव के बारे में जो भी कह रही हो, वो सच भी हैं... पर दूसरा सच ये भी है कि वो बेवजह किसी की जान नहीं लेता।” साक्षी बोली।

“बेवजह किसी की जान नहीं लेता से आपका क्या मतलब? क्या उसे कोई वजह मिले तो वो सामने वाले की जान ले सकता है?” आयु ने चौंकते हुए पूछा।

साक्षी कुछ पल के लिए चुप हो गई। वो आरव की काफी क्लोज फ्रेंड थी उस वजह से उसकी लाइफ से जुड़ी काफी बातें उसे पता थी।

“ऐसा कुछ नहीं है। बस फ्लो फ्लो में मेरे मुंह से निकल गया। वो क्यों किसी की जान लेगा। उसने ऐसा नहीं किया है।” साक्षी ने आयु को समझाने की कोशिश की।

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“अगर मैं प्रूफ कर दूं तो? बस बदले में आपको मुझे उस आरव खुराना तक पहुंचाना होगा... एंड वन मोर थिंग आप उसे ये नहीं बताओगे कि मैं उसे उसके किए की सजा देना चाहती हूं।” आयु ने कहा।

“पीठ पीछे वार करना चाहती हो?” मंथन ने सख्त आवाज में कहा।

आयु उसकी बात का कोई जवाब देती उससे पहले साक्षी बोल पड़ी, “ध्यान से, कहीं उस पर वार करने के चक्कर में खुद ही घायल ना हो जाओ। आरव को पीठ पीछे वार करने वाले लोगों से सख्त चिढ़ है।” साक्षी ने इशारों इशारों में उसे समझाने की कोशिश की।

“मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरा इरादा पक्का है। आप लोग मेरी हेल्प नहीं भी करोगे तो भी मैं वो करके रहूंगी, जो मैंने सोचा है।” आयु ने अपना आखिरी फैसला सुना दिया था। वो अभी भी अपनी जिद पर अड़ी थी।

साक्षी और मंथन वहां असमंजस की स्थिति में खड़े थे। उन्होंने एक दूसरे की तरफ देखा।‌ साक्षी और मंथन का समझाना बेकार साबित हो रहा था।

अब तक वो दोनों आयु को काफी नरमी से समझा रहे थे। उसके जिद करने पर मंथन ने सख्त आवाज में कहा, “तुम अपनी बहन के बहुत क्लोज थी ना, क्या तुमने कभी उसके मुंह से आरव खुराना का नाम सुना था?”

आयु ने ना में सिर्फ हिला दिया तो मंथन फिर बोला, “एक्जेक्टली। उन दोनों का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। तुम्हें क्या लगता है मैं इन सबसे दूर हूं तो मुझे अपडेट नहीं मिलती? उस वीडियो को शूट करने वाला इंसान भी रियल कातिल हो सकता है। फिर तुम्हारे शक के घेरे में आरव ही क्यों? उसके होटल से निकलने से लेकर होटल के बाद वो ऑफिस था, उस तक की फुटेज कोर्ट रूम में सबमिट हुई थी। चलो तुम इतना जिद कर ही रही हो, तो मान लेता हूं कि उस रात किसी ने अनु को धक्का दिया होगा। आरव को छोड़कर अगर तुम किसी और को कल्प्रिट समझकर उस पर फोकस करो और सच का पता लगाने की कोशिश करो, तो मैं हर तरीके से तुम्हारी हेल्प करूंगा।”

मंथन ने आयु की हेल्प करने के लिए हां तो कह दिया था पर वो इस बात को मानने से साफ इनकार कर रहा था कि उस रात आरव ने अनु को धक्का दिया होगा।

“ठीक है। तुम मेरी हेल्प करो, फिर क्या फर्क पड़ता है कि मैं किसी के भी पीछे जाऊं? मैं तुमसे प्रॉमिस करती हूं कि मैं सच का पता लगा कर तुम्हारे सामने लाकर रख दूंगी, लेकिन आरव खुराना ने ही ये सब किया होगा, तो तुम पीछे नहीं हटोगे?” आयु ने फिर अपनी शर्त रखी।

उसे कोई भी प्रॉमिस करने से पहले मंथन ने साक्षी की तरफ देखा। साक्षी ने उसकी तरफ पलके झपका कर हामी भरी।

“ठीक है फिर आई विल हेल्प यू। मैं यहां सिक्स मंथ के लिए हूं। बोलो तुम्हें किस तरह की हेल्प चाहिए?” मंथन ने पूछा।

“मुझे आरव खुराना तक पहुंचना है।” आयु ने तुरंत कहा।

“क्या तुम सच में ये करना चाहती हो और इसके लिए तैयार हो?” मंथन ने एक बार फिर पूछा।

“हां मैं करना चाहती हूं पर इससे पहले मैं खुद को तैयार करना चाहती हूं। मैने फाइट क्लब के एक बंदे को खुद को फिजिकली स्ट्रांग करने के लिए ट्रेनिंग देने को कहा था लेकिन उसने मना कर दिया। तुम फाइट क्लब में मेरी ट्रेनिंग की अरेंजमेंट करवा दो।” आयु ने कहा।

“तुम फाइट क्लब नहीं जाओगी एंड इट्स फाइनल।” मंथन ने सख्त शब्दों में कहा। बोलते हुए गलती से उसका आयु से आई कांटेक्ट हो गया था। उसकी आंखों में देखने के बाद एक पल के लिए वो वीक पड़ गया और तुरंत अपने कमरे में जाने लगा।

आयु उसके पीछे से चिल्लाई, “अरे तुम होते कौन हो मुझे ऑर्डर देने वाले.... मुझे जो करना होगा, वो मैं करूंगी। पहले तो कहते हो हेल्प करनी है और अब हर बात पर इरिटेट हो रहे हो। इतने पावरफुल हो लेकिन थोड़ी सी भी हेल्प नहीं कर सकते।”

“अगर मेरी हेल्प चाहिए तो कल से आंखों पर लैंसेस लगा कर आना, वरना मुझे दिखना भी मत। रही बात पावरफुल होने की, तो बिना लैंसेस के मेरे सामने आई तो उसका पता नहीं पहले मैं तुम्हें गायब करवा दूंगा।” मंथन ने उसकी तरफ बिना देखे कहा।

वो कमरे में चला गया और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उसकी बात सुनकर आयु अभी भी सकते में बाहर खड़ी थी जबकि साक्षी के चेहरे पर हल्की सुकून भरी मुस्कराहट थी। पिछले 1 महीने में मंथन ने बहस करना तो दूर किसी से ठीक से बात नहीं की थी। अब उसे नॉर्मल देखकर उसे एक होप नजर आ रही थी।

“सॉरी आरव, आई नो तुम इनोसेंट हो और ये कुछ भी कर ले, तुम खुद को कुछ नहीं होने दोगे। इसकी ये कोशिश कुछ काम करें या ना करें पर मेरे भाई को नॉर्मल जरूर कर सकती है, तो रेडी रहना इससे टकराने के लिए।” साक्षी ने मुस्कुराते हुए अपने मन में सोचा।

आरव को लेकर वो पूरी तरह कॉन्फिडेंट थी कि आयु चाहे कुछ भी कर ले पर वो आरव को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। इसलिए उसने आयु के जरिए मंथन को फिर से नॉर्मल करने का सोचा।

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