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Chapter 23

Tied with destiny - Chapter 23

Tied with destiny

सुबह के आठ बज रहे थे। आरव अभी तक अपने रूम के सीक्रेट पोर्शन में था। पूरी रात वो वहां पेंटिंग बनाने में लगा था और अब उसकी पेंटिंग बनकर तैयार हो चुकी थी।

पेंटिंग पूरी होने के बाद आरव अपने हाथ बांधे उसे खोए हुए अंदाज में देख रहा था। वो आयु की पेंटिंग थी, जिसकी आंखों में गुस्सा साफ नजर आ रहा था।

“ब्यूटीफुल... माय एम्बर आईड गर्ल...” आरव ने खोए हुए स्वर में कहा। तभी उसके फोन पर कबीर का कॉल आया। इसी के साथ उसका ध्यान टूटा।

“कहां गायब हो आप कल रात से? माहिरा मैम से पता चला आप घर आ गए थे। रूम में भी नहीं मिले? कहीं और हो क्या?” कबीर ने उसके कॉल रिसीव करते ही सवालों की झड़ी लगा दी।

“घर पर ही हूं। ब्रेकफास्ट टेबल पर मिलते हैं।” कहकर आरव ने कॉल कट कर दिया।

उस कमरे से बाहर निकलने से पहले उसने एक नजर कमरे में टंगी हुई सारी पेंटिंग्स को देखा। वो सभी डार्क सेड में थी जबकि उन सब पेंटिंग के बीच आयु की पेंटिंग ऐसी लग रही थी मानो किसी ने अंधेरे कमरे में दिया जला दिया हो।

आरव कमरे से बाहर आया और सीधा तैयार होने चला गया उसके बाद वो ब्रेकफास्ट टेबल पर पहुंचा जहां गौरवी जी और कबीर मौजूद थे।

“मैंने सुना है वो तुम्हारी गर्लफ्रेंड या बिजनेस पार्टनर जो भी है, इंडिया आई हुई है।” गौरवी जी ने खाना खाते हुए पूछा।

उनके ऐसा कहते ही आरव ने कबीर की तरफ तिरछी निगाहों से देखा। कबीर ने अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा, “मैंने कुछ नहीं बताया है।”

“इसी ने बताया है।” गौरवी जी ने हल्का मुस्कुरा कर कहा। फिर उन्होंने आरव की तरफ देखकर बोला, “अच्छा उसको आज रात डिनर के लिए बुलाओ ना... आई वांट टू मीट हर।”

“बट आई डोंट वांट..” आरव ने सीधे सीधे मना कर दिया।

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गौरवी जी ने बच्चो की तरह मुंह बनाया और कहा, “पर मेरा आज स्पेशल डिनर करने का मन रहा है... वो भी किसी खास इंसान के साथ।”

“मैं आम नही हूं दादी... किसी भी मामले में। हम रोज साथ में डिनर करते है.. और आपका हर डिनर स्पेशल होता हैं।” आरव ने मुस्कुराकर कहा। उसके मुस्कुराने पर एक गाल पर पड़ा डिंपल देखकर गौरवी जी ने चिढ़कर कहा, “तेरे इस डिंपल के अलावा तुझमें और कुछ खास नहीं हैं। जो कहा है, वो करो।”

“ठीक है। फिर साक्षी को कॉल करते है। वो मुंबई में है, माहिरा को कबीर संभाल लेगा।” आरव ने कबीर की तरफ देखकर कहा और अपने कमरे में जाने लगा।

“न... नही। प्लीज मेरे साथ ऐसा मत कीजिए सर। आई कांट।” कबीर ने लाचारगी से कहा।

आरव ने उसकी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया। उसके जाते ही कबीर गौरवी जी की तरफ देखकर बोला, “ये हर बार मुझे फंसा देते है। दादी आप भी ना... मुझे आपको माहिरा मैम के बारे में बताना ही नहीं चाहिए था।”

“ओए तू उसकी फिक्र मत कर... जैसा मैं कहती हूं वैसा कर। साक्षी उसकी गेस्ट होगी.. तू मेरी तरफ से माहिरा को इन्वाइट कर देना। उसके आने के बाद ये कुछ नही कर पायेगा।” गौरवी ने अपना प्लान बनाया।

“ये जान से मार देंगे मुझे।” कबीर ने ना में सिर हिलाते हुए कहा।

“अगर नही बुलाया तो बच तो तू वैसे भी नही पाएगा।” कहकर गौरवी जी वहां से चली गई।

“ये दोनो दादी पोते मुझे बीच में फंसा देते हैं।” कबीर ने सिर हिलाया। वो भी वहां से चला गया।

वही आरव संडे होने की वजह से घर पर ही था। उसने साक्षी को डिनर पर इनवाइट करने के लिए कॉल किया।

साक्षी किचन में ब्रेकफास्ट बना रही थी तो मंथन उसकी हेल्प कर रहा था। वही आयु अभी तक आराम से सो रही थी। मंथन ने साक्षी को आयु के वहां होने की बात बता दी थी।

“तुम जाकर उसे उठाओ, ब्रेकफास्ट रेडी हो गया है।” साक्षी ने मंथन से कहा, जिस पर उसने ना में सिर हिला दिया। वो उसे आगे कुछ कहता उससे पहले उसके पास आरव का कॉल आ गया।

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“आरव..ये मुझे क्यों कॉल कर रहा है?” साक्षी ने हैरानी दिखाते हुए कहा। दोनों फ्रेंड्स जरूर थे लेकिन अपने अपने काम में फंसे होने की वजह से काम होने पर ही वो एक दूसरे को कॉल किया करते थे।

“कल रात को वो मुझे पार्टी में मिले थे और मैंने उन्हें आपके यहां होने की बात बताई। जरूर वो मिलने की बात कर रहे होंगे।” मंथन ने बताया।

आरव ने उसे डायरेक्ट वीडियो कॉल किया था। मंथन ने कॉल पिक किया और साक्षी के सामने फोन पकड़ कर खड़ा हो गया जबकि अभी तक साक्षी कुकिंग में लगी थी।

“आते ही तुम्हें काम पर लगा दिया। अगर तुम्हें यही सब करना था तो पहले बता देती ना... मैं तुम्हें अपने घर बुला लेता इसी बहाने तुम्हारे हाथ का टेस्टी खाना खाने को मिल जाता।” साक्षी को कुकिंग करते देखा आरव ने कहा।

“वेरी फनी... तुम मुझे अपने घर पर क्यों बुलाओगे। हम पिछले काफी सालों से एक दूसरे को जानते हैं। बिना किसी पार्टी के मैं तुम्हारे घर पर नहीं आई हूं। तुम और मुझे कैजुअली इनवाइट करो, इतने अच्छे दिन नहीं आए हैं मेरे।” साक्षी ने मुस्कुरा कर कहा।

“बस इतनी सी बात? समझ लो तुम्हारे अच्छे दिन आ गए हैं। आज रात की डिनर पार्टी मेरे घर पर मेरी तरफ से... यू एंड मंथन बोथ आर इनवाइटेड।” आरव ने जवाब दिया।

आरव के इनवाइट करते ही मंथन ने पीछे से ना में सिर हिलाया। वो बाहर नहीं जाना चाहता था तभी पीछे से आयु निकल कर आई। वो उठ चुकी थी और अपनी ड्रेस को संभालते हुए बाहर आ रही थी।

नींद से उठने के बाद उसके बाल खुले और बिखरे हुए थे। आरव साक्षी से बात कर रहा था कि तभी उसने पीछे से आयु को देखा तो वो चौंक गया।

“वो...वो लड़की कौन है?” आरव ने जल्दी से पूछा तो मंथन ने फोन घुमा दिया।

आयु जिस इरादे से आरव से मिलना चाहती थी, मंथन नहीं चाहता था उस बारे में आरव को जरा सी भी भनक हो।

“मैं आ जाऊंगी। मैं बाद में बात करती हूं तुमसे।” कहकर साक्षी ने जल्दी से कॉल कट कर दिया।

उसके कॉल कट करते ही आरव ने खुद से कहा, “तुम आओ या ना आओ लेकिन अब मैं तुम्हारे घर आ रहा हूं। वो तुम्हारे घर पर है... तुम उसे कैसे जानती हो। पहले मैंने कभी तुम्हारे मुंह से उसका जिक्र नहीं सुना। मैं तुम्हारी पूरी फैमिली से मिला हूं फिर वह... कौन है वह?”

खुद से बातें करते हुए आरव जल्दी से उठा और तुरंत अपनी गाड़ी लेकर साक्षी के घर जाने के लिए निकल गया।

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