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Chapter 25

Tied with destiny - Chapter 25

Tied with destiny

मंथन आयु को लेकर हॉस्पिटल जा रहा था। दोनों गाड़ी में थे। उसे समझ नहीं आ रहा था कि मंथन और साक्षी अजीब बर्ताव क्यों कर रहे थे? उन्होंने सुबह-सुबह अचानक आयु को अपने घर से निकाल दिया।

कुछ देर बाद जब आयु को थोड़ा बैटर फील होने लगा, तब उसने मंथन से कहा, “मैं ठीक हूं। अब मुझे अपने घर ही छोड़ देना। तुम चाहो तो उस दिन की तरह मुझे बीच में भी उतार सकते हो। मैं कैब लेकर चली जाऊंगी।” कैब लेने का कहने पर आयु को ख्याल आया कि उसने अपना पर्स और मोबाइल दोनों ही वहां पर छोड़ दिया है।

आयु ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिर सिर पकड़ कर कहा, “तुम्हें बैक लेना होगा। मेरा पर्स और मोबाइल तुम्हारे घर पर रह गया है।”

“डॉन्ट वरी आई विल रिटर्न यू... और तुम्हें बेहतर लग रहा है तो मैं तुम्हें तुम्हारे घर पर ही ड्रॉप कर देता हूं।” मंथन ने जवाब दिया। फिर उसने आयु की तरफ देखा जो अब वाकई थोड़ी ठीक लग रही थी।

मंथन ने आगे कुछ नहीं कहा। थोड़ी दूर चलने पर उसे एक ग्रोसरी स्टोर दिखाई दिया तो उसने गाड़ी रोककर आयु के लिए चॉकलेट ली।

वापस गाड़ी में आने के बाद उसने चॉकलेट आयु की तरफ बढ़ाकर कहा, “इसे खा लो। थोड़ी एनर्जी मिलेगी बीमार डॉक्टर।”

“डोंट कॉल मी दैट।” कहते हुए आयु ने उसके हाथ से चॉकलेट ली और खाने लगी।

मंथन ने उसे चॉकलेट खाते देखा तो उसके फेस पर छोटी सी स्माइल थी। वो गाड़ी ड्राइव करते हुए बोला, “सुना है डॉक्टर अपनी हेल्थ का खास ख्याल रखते हैं। फिर तुम बीमार कैसे पड़ गई आई मीन इतनी कम एज में तुम्हें बीपी का प्रॉब्लम है।”

“मुझे लगा तुम्हारी अनु ने तुम्हें इस बारे में बताया होगा। वैसे भी तुम्हारे मुंह से यही सुनती रहती हूं मेरी अनु ने ये कहा था, मेरी अनु ये बोलती थी। मेरे बारे में नहीं बताया उसने कि मेरी तबीयत खराब क्यों रहती है?” बोलते हुए आयु ने मंथन की तरफ घूर कर देखा।

“नहीं, उसने नहीं बताया। चलो अब तुम बता दो।” मंथन ने फिर पूछा।

“एज यू नो हम दोनों ट्विंस है। कुछ केसेज में ट्विंस बेबी में एक बेबी थोड़ा वीक पैदा होता है एंड आई वॉज द वन... बस इसी के चलते मेरे घरवाले मेरी एक्स्ट्रा केयर करते हैं, एनीटाइम मुझे ऐसे ट्रीट करते हैं जैसे मैं बीमार हूं... मुझे कुछ अजीब हेल्थ इश्यूज है, जिसमे मॉर्निंग सिकनेस एक है... इतनी सारी बीमारियां है तो सोचा डॉक्टर बन जाऊं और खुद का इलाज खुद ही कर लूं।” आयु ने उसे काफी ड्रैमेटिक वे में बताया जिसे सुनकर मंथन हंसने लगा।

“तुम्हारे बारे में उसने कुछ बताया हो या ना बताया हो पर एक बात बिल्कुल ठीक कही थी। तुम बिल्कुल बच्चों की तरह रिएक्ट करती हो। छोटी सी चीज पर खुश हो जाती हो तो उससे भी छोटी बात पर नाराज हो जाती हो।” मंथन अनु के बारे में बात कर रहा था तो काफी एक्साइटेड नजर आ रहा था, जिसे आयु ने भी नोटिस किया।

वो उसकी बातें काफी गौर से सुन रही थी। “तुम उससे बहुत प्यार करते हो ना...” अचानक आयु ने पूछा।

उसके पूछने पर मंथन का चेहरा फिर से गंभीर हो गया। उसने हां में सिर हिलाया। कुछ देर तक उन दोनों के बीच में ही अजीब चुप्पी छाई रही।

आयु ने महसूस किया उस की वजह से मंथन का मूड खराब हो गया। उसका मूड सही करने के लिए उसने कहा, “पता है मुझे क्या लगता था। जब पहली बार मुझे अनु ने तुम्हारे बारे में बताया तो मुझे तुमसे बहुत जेलिसी हुई थी। हर बार यही लगता था कि मेरे अलावा मेरी बहन के क्लोज और कोई कैसे आ सकता है। मैंने तुम्हारी फोटो जरूर देखी थी पर तुमसे कभी मिलने का नहीं सोचा था। तुम वहां दिल्ली में रहते थे तो अनु यहां मुंबई में... दोनों ही अपनी-अपनी लाइफ में बिजी। लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप बोरिंग होती है... एंड आई डोंट थिंक सो कि उनमें प्यार भी होता होगा।”

जब तक मंथन ने आयु की बात का जवाब नहीं दिया वो लगातार बोले जा रही थी।

जैसे ही आयु ने लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में प्यार ना होने की बात कही, मंथन तुरंत बोला, “ऐसा बिल्कुल नहीं है। लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप में भी प्यार होता है और इनफैक्ट ज्यादा प्यार होता है। पास रहते है तो रिलेशन थोड़ा बोरिंग फील हो जाता है। रोज मिलना, रोज वही बोरिंग लाइफ स्टाइल फॉलो करना लेकिन कभी कभार मिलते हैं तो उस मोमेंट का वेट रहता है जब आपके चाहने वाला आपके करीब आता है।”

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“हां जो भी है पर मेरी थ्योरी थोड़ी अलग है। मैं तो अपने प्यार का चेहरा हर रोज देखना चाहूंगी। मेरी सुबह की शुरुआत उसी के साथ होगी तो दिन भी उसी के साथ खत्म होना चाहिए।” आयु ने मुस्कुराकर जवाब दिया।

आयु के मुंह से प्यार की बात सुनकर मंथन को अयान की याद आ गई जब आरव ने अयान को आयु का बॉयफ्रेंड बताया था।

“ओह तो यही वजह है तुमने उसे चुना। ये भी सही है। तुम दोनों साथ काम करते हो तो तुम्हारी दिन की शुरुआत उसके साथ होती है तो दिन खत्म भी उसी के साथ...” अचानक मंथन के मुंह से निकला।

उसकी बात सुनकर आयु को हैरानी हुई। “तुम किसकी बात कर रहे हो?” आयु ने उसी लहजे में पूछा।

“किसी की नहीं।” मंथन ने जवाब दिया। वो आयु से अयान के बारे में बात नहीं करना चाहता था।

इससे आगे वो कुछ पूछ पाती उससे पहले मंथन ने गाड़ी रोकी। आयु का घर आ चुका था। आयु को कुछ पूछने का मौका नहीं मिला। वो गाड़ी से बाहर निकली।

अंदर जाने से पहले उसने मंथन के पास आकर विंडो का डोर नॉक किया। मंथन ने गाड़ी की विंडो ओपन की तो आयु ने कहा, “शाम को मिले? मेरा पर्स और मोबाइल भी वापस कर देना।”

“ठीक है, फिर मेरे ही घर पर मिलते हैं।” कहकर मंथन ने गाड़ी की विंडो वापस क्लोज की और वहां से चला गया।

आयु उसे जाते हुए देख रही थी। उसके चेहरे पर हल्की स्माइल थी।

“हां मैं गलत थी और हर बार की तरह तुम सही... ये तुमसे सच में बहुत प्यार करता है और है भी बहुत अच्छा... इतना अच्छा कि किसी का भी इस पर दिल आ जाए।” बोलते हुए आयु की आंखों के आगे मंथन का चेहरा था।

जब उसने उसे गोद में उठाया था और मुस्कुरा कर उसकी तरफ देख रहा था, वो सब चीजें उसे उसकी तरफ खींच रही थी। आयु के चेहरे पर स्माइल थी और वो गुनगुनाते हुए घर के अंदर जा रही थी।

______________

शाम के लगभग 8:00 बज रहे थे। गौरवी जी के कहने पर कबीर ने माहिरा को डिनर के लिए इनवाइट कर दिया था। आरव इस बात से अब तक अनजान था। वो बस साक्षी के आने का वेट कर रहा था।

हालांकि उसने साक्षी को आयु को भी अपने साथ लाने के लिए कहा था लेकिन वो साथ ही ये भी जानता था कि वो अकेली ही डिनर पर आएगी।

साक्षी के वहां आते ही उसे अकेले देखकर आरव ने उसे टोंटिग वे में कहा, “देखा मैंने कहा था। तुम मुझसे जलती हो। तुमसे मेरी खुशियां बर्दाश्त नहीं होती, तभी तुम उसे यहां लेकर नहीं आई।”

“वो मंथन की गेस्ट थी। मैं उसे पर्सनली नहीं जानती हूं।” साक्षी ने जवाब दिया।

“ओह तभी वो उसे अजीब नज़रों से देख रहा था। खैर छोड़ो... चलो आओ, दादी से मिलवाता हूं तुम्हे।” कहकर आरव उसे अंदर लेकर आया।

गौरवी जी साक्षी से मिलकर काफी खुश हुई। डिनर का इंतजाम बाहर गार्डन एरिया में किया गया था। वही कबीर ने भी सब कुछ अरेंज कर दिया था लेकिन उन्हें माहिरा के आने का इंतजार था।

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साक्षी को आए हुए काफी टाइम हो गया था। पहले सब साथ में मिलकर बातें कर रहे थे। जब डिनर पर टाइम हुआ तो आरव ने गौरवी जी से कहा, “दादी हमने साक्षी को डिनर के लिए बुलाया है ना कि ब्रेकफास्ट के लिए। आपने सारी प्रिपरेशन करवा दी है ना?”

“हां सब तैयार है, बस मुझे किसी का इंतजार है।” बोलते हुए गौरवी जी ने कबीर की तरफ देखा।

“दादी वो बस आ ही रही हैं।” कबीर ने जवाब दिया।

आरव कबीर से कुछ पूछ ना ले यही सोचकर कबीर ने अपने चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। वो अपने मन में बड़बड़ाते हुए बोला, “प्लीज गॉड... सेव भी। जब तक माहिरा मैम यहां नहीं आ जाती तब तक आरव सर मुझसे कुछ ना पूछे। आई होप सो ये समझें कि ये सब मेरा नहीं दादी का प्लान था।” कबीर मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रहा था।

इस बीच माहिरा भी वहां पहुंच चुकी थी। वो सब लिविंग रूम में थे। बाहर गार्ड से कबीर को माहिरा के आने का पता चला। उसने गौरवी जी के पास आकर फुसफुसा कर कहा, “दादी माहिरा मैम आ गई है। याद है ना आपने प्रॉमिस किया था आप मुझे आरव सर से बचाएंगी। उनके जाने के बाद भूल मत जाना।”

“हां हां नहीं भूलूंगी।” गौरवी जी ने दबी आवाज में जवाब दिया। फिर उसने आरव की तरफ देख कर कहा, “कब से बैठ कर बातें कर रहे हो। खाना ठंडा हो रहा है। चलो गार्डन एरिया में चलते हैं।”

उनके ऐसा कहने पर साक्षी और आरव एक दूसरे की तरफ हैरानी से देखने लगे। आरव ने साक्षी से धीमी आवाज में कहा, “आई एम डैम श्योर ये दोनों मिलकर कोई खिचड़ी पका रहे हैं। दादी का तो पता नहीं पर ये कबीर मेरे हाथों से आज बचने वाला नहीं है।”

उसकी बात सुनकर साक्षी मुस्कुरा दी। वो चारों बाहर आए तो सामने माहिरा खड़ी थी। उसे देखकर आरव के चेहरे के एक्सप्रेशन बिगड़ गए। उसने गुस्से में कबीर की तरफ देखा तो कबीर ने तुरंत अपनी नजरें घुमा ली।

वही माहिरा आज पहली बार गौरवी जी से मिल रही थी। वो जानती थी कि आरव के लिए गौरवी की कितनी मायने रखती थी इसलिए उन्हें इंप्रेस करने के लिए वो साड़ी पहन कर आई थी।

“थैंक यू सो मच बेटा। इतने शॉर्ट नोटिस पर आने के लिए है।” गौरवी जी ने माहिरा के पास आकर कहा।

“मेंशन नॉट दादी, एक ना एक दिन तो मुझे इस घर में रहने के लिए आना ही है। आई नो इंडिया में अपने ससुराल मैं पहले नहीं आते हैं बट आजकल टाइम बदल गया है। मैं तो आरव को कब से बोल रही थी कि मुझे आपसे मिलवा दे। चलिए किसी भी बहाने से ही सही, मैं आप से मिल ली।” माहिरा काफी कॉन्फिडेंस के साथ बात कर रही थी।

उसकी बातें सुनकर साक्षी की हंसी छूट गई। उसने आरव की तरफ देखा जिसके चेहरे पर इरिटेशन साफ नजर आ रही थी।

साक्षी ने आरव के कोहनी मारी और धीमी आवाज में कहा, “क्या बात है ससुराल एंड ऑल? सुबह तो तुम किसी और के पीछे ही दीवाने बने घूम रहे थे। मेरे घर तक चले आए। क्या तुम्हारी इस ना होने वाली पत्नी को पता है कि तुम किसी और के पीछे की दीवाने बने घूम रहे हो।”

“शट अप साक्षी। मैं किसी के पीछे दीवाना नहीं हूं। मैं बस उससे मिलना चाहता हूं और उसे कुछ जानना चाहता हूं, बस यही वजह थी।” आरव ने बहाना बनाया।

“तुम कहो तो एक प्रोफेशनल मीटिंग फिक्स करवा दूं?” साक्षी ने उसे परेशान करते हुए कहा।

“नो थैंक्स, आरव खुराना को किसी की जरूरत नहीं है। उसे अपनी मंजिल तक के रास्ते खुद बनाने आते हैं।” आरव ने जवाब दिया।

डाइनिंग टेबल पर सब साथ में डिनर ले रहे थे तो वहीं आरव और साक्षी के इतना घुल मिलकर आपस में फुसफुसा कर बातें करने की वजह से माहिरा उसकी तरफ घूर कर देख रही थी। उसने गुस्से में अपनी साड़ी मुट्ठी में भर रखी थी।

“लगता है इसका जीने से मन भर गया है।” माहिरा ने आंखें बंद करके सोचा।

माहिरा के सामने आरव का किसी और के करीब होना, खतरा आरव को नही इस वक्त साक्षी को था, जिसे वो खा जाने वाली नजरों से देख रही थी।

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