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Chapter 10

Tied with destiny - Chapter 10

Tied with destiny

फ्रैंकी के ट्रेनिंग सेंटर का एड्रेस भेजने के बाद आयुष्का तुरंत वहां जाने के लिए निकल गई। रास्ते में वो ट्रैफिक में फंस गई थीं, इस वजह से उसे थोड़ी लेट हो गई थी।

जैसे ही वो वहां पहुंची, उस एरिया को गौर से देखने लगी। वो एक बड़ी सी बिल्डिंग थी जिसके 4th फ्लोर पर जिम के साथ ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया था। वो जगह काफी बड़ी थी।

“ओ वाओ... लोगों को दिखाने के लिए जिम खोल रखा है और यहां साथ में रिंग फाइट भी होती है। सही तरीका है अपने इलीगल कामों को छुपाने के लिए... लीगल तरीके से कोई भी काम खोलो, इससे आपका ब्लैक मनी वाइट हो जाएगा। अगर मेरी मजबूरी नहीं होती तो इस जगह पर मैं कभी नहीं आती।” आयुष्का को वो जगह पसंद नहीं आई थी, फिर भी खुद को स्ट्रांग बनाने के लिए उसे कंप्रोमाइज करना पड़ रहा था।

वो एंट्रेंस पर खड़ी उस जगह का मुआवना कर रही थी। हॉल के शुरू होते ही एक कोने में रिसेप्शन टेबल लगी थी। आगे के आधे हिस्से को जिम में बदला गया था जबकि दूसरी तरफ का हिस्सा एक रेसलिंग मैदान की तरह बनाया हुआ था। जिम की तरफ कुछ लोग थे जो एक्सरसाइज कर रहे थे। दूसरा हिस्से में ज्यादा लोग नही थी और वहां शांति थी।

“अरे मैडम आप आ गई। मैं बस आप का ही वेट कर रहा था।” फ्रैंकी को आयु दिखाई दी तो उसने दूर से ही आवाज लगाई।

उसे देखकर आयु ने अपना हाथ ऊपर उठाया और हल्की मुस्कुराहट दी। वो अंदर चली गई।

“मैंने बहुत मुश्किल से सर को रोक कर रखा है। उनके पास सिर्फ दस मिनट है। इस दस मिनट में आपको उन्हें ये साबित करना होगा कि आप इस ट्रेनिंग के लायक हैं। वो ऐसे ही किसी को ट्रेनिंग नहीं देते हैं।” फ्रैंकी ने अंदर जाने से पहले उसे सब कुछ समझाया।

आयुष्का ने उसकी बात पर हामी भरी और उसके साथ अंदर गई। वहां आगे चलकर एक क्यूबिकल बनाया हुआ था, जिसके अंदर एक लगभग 35 साल का आदमी बैठा हुआ था। वो दिखने में काफी लंबा चौड़ा और हट्टा कट्टा था।

जैसे ही आयुष्का अंदर गई, उस आदमी ने ऊपर से लेकर नीचे तक उसे गौर से देखा और फिर कहा, “ये लड़की ट्रेनिंग करना चाहती है? एक्ट्रेस हो क्या तुम, जो किसी मूवी में दिखाने के लिए एक्शन सीन सीखने की इच्छा से यहां आई हो?” उसने आयुष्का को देखकर अंदाजा लगाया।

“नहीं सर जी, ये तो डॉक्टर है।” जैसे ही फ्रैंकी ने बताया वो आदमी जोर से हंसने लगा।

“अगर डॉक्टर है तो हड्डियां जोड़ने के बजाए तुड़वाने क्यों आई है?” उसने हंसकर कहा।

“आपको मुझे ट्रेनिंग देने से मतलब है फिर क्या फर्क पड़ता है कि मैं किसी भी प्रोफेशन से क्यों ना हूं।” आयु ने सख्ती से जवाब दिया, जिससे वो पहली बार में ही इंप्रेस हो गया।

“दम तो है। चलो देख लेते हैं इस नाजुक से शरीर में कितनी ताकत है।” उस आदमी ने कहा और उठकर आयु के पास आया। “मेरा नाम जहान है।”

आयु ने उसे अपना परिचय देते हुए कहा, “और मेरा नाम आयु है।” उसने उसे अपना पूरा नाम नहीं बताया।

“आयु? ये कैसा बच्चों जैसा नाम है। खैर छोड़ो... पहले तुम्हारी स्ट्रेंथ का अंदाजा लगा लेते हैं। बाकी चीजें बाद में डिसाइड करेंगे।” जहान बोला।

“मेरी फिजिकल स्ट्रैंथ बहुत वीक है इसीलिए मैं यहां आई थी।” आयु ने मायूसी से जवाब दिया। उसने यहां जितने भी लोगों को देखा था, वो सब फिजिकली काफी स्ट्रॉन्ग नजर आ रहे थे।

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“और मेंटल स्ट्रैंथ नाम की चीज तो जैसे दुनिया में होती ही नहीं है।” जहान ने हंसकर जवाब दिया।

जहान की फिजिकल अपीयरेंस देखने के बाद आयु को लगा था कि वो कोई सख्त और स्ट्रिक्ट सा आदमी होगा लेकिन जहान काफी जिंदादिल और हंसमुख टाइप का इंसान था। उसके बोलने के लहजे से भी पता चल रहा था कि वो कोई पढ़ा-लिखा और समझदार टाइप का आदमी है।

आयु ने उसकी बात पर हामी भरी। आयु का पूरा ध्यान उस से बातें करने में था, तभी अचानक जहान ने अपने हाथ का पंच बनाया और आयु की तरफ वार करने के लिए आगे बढ़ाया। वो तुरंत नीचे झुक गई।

उसके ऐसा करने पर जहान ने एक नजर फ्रैंकी की तरफ देखा, जिसके चेहरे पर स्माइल थी।

“क्या मैडम जी पहली बार में ही समझ गई। अक्सर बड़े-बड़े इसमें मात खा जाते हैं। अचानक हुए हमले से हड़बड़ा जाते हैं और उन्हें चोट लग जाती है। आपने तो कमाल कर दिया।” फ्रैंकी ने ताली बजाते हुए कहा, जिस पर आयु खुश हो गई।

“इतना खुश होने की जरूरत नहीं है। ये बहुत छोटा सा टेस्ट था।” जहान ने मुंह बनाकर कहा। उसने आयु को इशारे से अपने पीछे आने को कहा।

जहान के पीछे-पीछे आयु और फ्रैंकी दोनों ही आ रहे थे। बाहर आते ही जहान ने तेज आवाज में कहा, “धारा... धारा कहां हो?” उसने धारा को बुलाने के लिए आवाज लगाईं।

उसके बुलाने पर धारा नाम की एक लड़की आई। जहान ने आयु का और धारा का इंट्रोडक्शन कराया और फिर कहा, “आयु ये धारा है। हमारी ट्रेनिंग तीन फेजेस में होती है, जिसमें पहला फेज धारा कंप्लीट करवाती है।”

धारा ने मुस्कुराते हुए आयु से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया। जैसे आयु ने उससे हाथ मिलाया धारा ने उसका हाथ जोर से दबा दिया, जिससे आयु के मुंह से आह निकल गई।

“तुम्हें तो बहुत ज्यादा ट्रेनिंग की जरूरत है लड़की। एक लड़की को इतना भी वीक नहीं होना चाहिए। कम से कम सेल्फ डिफेंस तो आना ही चाहिए।” जहान ने कहा।

“तो क्या मैंने टेस्ट पास कर लिया?” आयु ने जहान की तरफ देखकर पूछा। उसके हाथ में दर्द हो रहा था इसलिए वो अपने हाथ को हवा में झटक रही थी।

“वैसे तो तुम जैसे स्टूडेंट्स की यहां कोई जगह नहीं है पर तुम एक डॉक्टर हो। हमें यहां डॉक्टर की जरूरत पड़ती है। कई बार ईलीगल फाइट के चलते हम लोग हॉस्पिटल नहीं जा सकते।फ्रैंकी ने मुझे बताया कि तुम इसके और फाइट के बारे में सब कुछ जानती हो। मैं तुम्हें ट्रेनिंग दे दूंगा बस बदले में तुम्हें फाइट में इंजर्ड हुए लोगों का ट्रीटमेंट करना पड़ेगा, वो भी फ्री में। तुम्हारी ट्रेनिंग भी फ्री होगी।” जहान ने ट्रेनिंग देने से पहले शर्त रखी।

“नहीं, मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी। मैंने फ्रैंकी को भी बहुत बार कहा है कि वो फाइट में इंजर्ड होकर हमारे हॉस्पिटल में ना आए। मुझे आपकी शर्त मंजूर नहीं है।” आयु ने तुरंत मना कर दिया, जिस पर फ्रैंकी और जहान दोनों को ही हैरानी हुई।

“एक बार फिर सोच लो। तुम्हें हमसे अच्छी ट्रेनिंग और कोई नहीं दे पाएगा। हमसे अच्छी छोड़ो, तुम्हें यहां हमारे जैसे ट्रेनिंग देने के लिए कोई मिलेगा तक नहीं... वो सिर्फ डिफेंस करना सिखाते है या कुछ नॉर्मल मूव्स। सेल्फ ट्रेनिंग में बहुत टाइम लग जाएगा। तुम एक गोल्डन ऑपर्च्युनिटी मिस कर रही हो डॉक्टर।” जहान ने एक बार फिर पूछा।

आयु कुछ पल के लिए सोच में पड़ गई। उसने आरव से बदला लेने का सोचा था, उसमें जहान उसकी मदद कर सकता था। उससे पहली बार मिलने पर ही वो समझ गई थी कि वो ना सिर्फ उसे फिजिकली बल्कि मेंटली और स्ट्रांग बना देगा। फिर भी उसने जो भी शर्त रखी थी, उसे पूरा करने के लिए उसका दिल गवाही नहीं दे रहा था।

आयु ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिर मुस्कुरा कर कहा, “आई नो मेरे लिए डिसीजन लेना बहुत मुश्किल है पर फिर भी मेरी तरफ से ना है। मैं अपनी उसूलों की पक्की हूं। आज नहीं तो कल आपके जैसा कोई और मिल ही जाएगा।”

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जहान भी अपनी जिद्द का पक्का था। उसने आयु को ट्रेनिंग देने के लिए हां नहीं की और उसे जाने के लिए दरवाजे का रास्ता दिखाया। उसके मना करने पर फ्रैंकी का भी चेहरा उतर गया था।

“मिलकर अच्छा लगा।” वहां से जाने से पहले आयु ने जहान से कहा, “तुम्हें देखकर लगता है कि तुम एक पढ़े लिखे और सेंसिबल इंसान हो। फिर इस तरह ये इल्लीगल काम क्यों करते हो? बहुत से लोगों को सेल्फ डिफेंस सीखना चाहते है। उन्हें सिखाओ। उससे भी तुम पैसे कमा सकते हो। फिर गलत काम करके पैसे कमाने की क्या जरूरत है।”

“अगर तुम्हारा ये ज्ञान देना हो गया है, तो तुम यहां से जा सकती हो। अक्सर ये उसूलों वाली बातें वही लोग करते हैं, जिनके पास पहले से पैसा होता है। तुम्हारा बिहेवियर और शक्ल देखकर कोई भी कह देगा कि तुम बहुत नाज़ों से पली हो, इतने नाज़ों से कि एक लड़की के धीरे से हाथ का दबाना तक नहीं सहन कर पाई और तुम्हारी आंखों में आंसू भर आए थे। जिस दिन जिंदगी मैं पैसों की कमी महसूस होगी, उस दिन तुम्हारे उसूल धरे रह जाएंगे मैडम।” जहान ने सख्त शब्दों में कहा और अपने दोनों हाथ जोड़ लिए।

उसके मना करने पर आयु को बहुत बुरा लग रहा था पर फिर भी वो वहां से निकल आई। वो पार्किंग एरिया की तरफ गुस्से में बड़बड़ाती हुए जा रही थी।

“अरे नहीं पसंद मुझे वो लोग जो ग़लत काम करते हैं। उन्हीं की वजह से और लोगों को सफर करना पड़ता है। मेरी मजबूरी नहीं होती तो मैं यहां कभी नहीं आती। अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। जो होगा देखा जाएगा। मैं जैसी भी हूं, उस आरव खुराना को टक्कर दे सकती हूं... पर उससे पहले मुझे उस तक पहुंचने का रास्ता ढूंढना होगा।” आयु ने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और उसे हॉस्पिटल की तरफ बढ़ा लिया।

पहले ही वो ट्रैफिक की वजह से लेट हो चुकी थी और उसे जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंचना था।

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अनुष्का की मौत को एक महीना भी चुका था लेकिन फिर भी मंथन अभी भी अपना सारा काम अपने रूम से ही कर रहा था। उसके लिए अनुष्का की यादों से बाहर निकल पाना बहुत मुश्किल साबित हो रहा था।

वो लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था, तभी उसके पास कोई कॉल आया। स्क्रीन पर आ रहे नाम को देखकर मंथन ने हैरानी से कहा, “पूरे एक महीने बाद इसने अब कॉल किया है। जब एक महीने तक वो शांत थी तो अब... आई होप सब ठीक हो और वो लड़की कोई गड़बड़ ना कर दे।”

मंथन ने कॉल पिक किया तो सामने से आवाज आई। “एक महीने तक वो शांति थी, तो मुझे लगा कि वो अब कुछ नहीं करने वाली। मैंने तो वापिस आने का भी सोच लिया था सर लेकिन हम गलत थे।”

“क्या किया है उसने अब?” मंथन ने तुरंत पूछा।

“वो अभी-अभी एक ऐसे ट्रेनिंग सेंटर से निकली है जहां पर ईलीगल तरीके से लोगों को रिंग फाइट या गैंगस्टर के अंडर काम करने के लिए ट्रेनिंग दी जाती हैं। आप इसका मतलब समझ रहे हो ना सर?” सामने से एक आदमी ने जवाब दिया। ये वही आदमी था, जिसे मंथन ने आयु की जासूसी के काम पर लगाया था।

“हां अच्छे से समझ रहा हूं। तो वो खुद को तैयार कर रही है। उसे कुछ भी करके रोकना होगा शांतनु।” मंथन ने परेशान स्वर में कहा।

“तो क्या मैं जाकर उससे बात करूं? अगर हमने बात की तो उसे सब समझ आ जाएगा। वो गुस्से में ट्रेनिंग सेंटर से बाहर निकली थी। मैं उसकी बात तो नहीं सुन पाया पर मामला ठीक नहीं लग रहा। अगर वो उन लोगों के कांटेक्ट में आई तो उसकी रेपुटेशन तक दांव पर लग सकती है। उसके पीछे रहते हुए मैंने महसूस किया है कि वो एक अच्छी इंसान है।” पिछले एक महीने में शांतनु ने आयु को काफी अच्छे से ऑब्जर्व किया था। वो उस हिसाब से ही मंथन को सब बता रहा था।

“अच्छी तो होना ही है आफ्टर ऑल मेरी अनु की ट्विन सिस्टर है। लगता है अब मुझे इंवॉल्व होना ही पड़ेगा। तुम ऐसा करो मेरे लिए हमारा फ्लैट रेडी करवाओ।” कहकर मंथन ने कॉल कट कर दिया।

उसने बेड साइड पर लगी अपनी और अनु की तस्वीर को देखा और कहा, “काश हर बार की तरह अपनी बहन के सिली हरकतों को रोकने के लिए तुम यहां होती। खैर तुम नहीं तो मैं सही। मुझे उसके लिए मुंबई जाना ही होगा।”

मंथन ने तुरंत अपना काम वही छोड़ा और आयु की सेफ्टी के लिए मुंबई जाने का डिसाइड किया। उसने अपना सामान पैक किया और कुछ ही देर में सामान के साथ बाहर निकला तो वही साक्षी ने एक महीने बाद मंथन को सामान के साथ अपने कमरे के बाहर देखा तो वो भी हैरान थी।

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