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Chapter 9

Tied with destiny - Chapter 9

Tied with destiny

आयुष्का ने फ्रैंकी को खुद को ट्रेनिंग देने के लिए तो मना तो लिया था पर ये इतना आसान नहीं रहने वाला था। वो एक डॉक्टर थी। अनुष्का के जाने के बाद उसके घर वाले भी उसे लेकर एक्स्ट्रा केयरफुल हो गए थे ऐसे में उसके लिए ट्रेनिंग के लिए जाना काफी मुश्किल साबित होने वाला था।

आयुष्का अपने केबिन में चहलकदमी करते हुए इस बारे में सोच रही थी। “सबसे पहले ड्यूटी का सेट करना होगा। नाइट ड्यूटी शिफ्ट करवा लेती हूं। अयान को ट्रेनिंग के बारे में बताया तो वो समझ जाएगा मेरे मन में क्या चल रहा है और उसका लेक्चर फिर शुरू हो जाएगा.... ओके हॉस्पिटल का सब सेट है.. अब घर का सोचना होगा। घर पर नाइट ड्यूटी का बोल दूंगी और दिन में एग्जाम प्रिपरेशन और क्लासेज का बहाना लगा दूंगी। जो एक्स्ट्रा टाइम बचेगा, उसमे सोना और स्टडी एडजस्ट करनी होगी।”

आयुष्का के चेहरे पर हल्की स्माइल थी। उसने ट्रेनिंग, हॉस्पिटल और घर पर क्या कहना है, इन सबका शेड्यूल सेट कर लिया था।

“चलो तो फिर शुरुआत हॉस्पिटल से की जाए।” बोलते हुए आयुष्का ने अपनी नाइट ड्यूटी शिफ्ट करने की एप्लीकेशन टाइप की और तुरंत उसे अपने सीनियर अयान सिंघानिया को सेंड कर दिया।

जैसे ही आयुष्का अयान को एप्लीकेशन लेटर सेंड कर के बैठी। उसके पास फ्रैंकी का कॉल आया। “तुमने इतनी जल्दी वापस कॉल क्यों किया? कहीं तुमने मना करने के लिए तो ये कॉल नहीं किया है ना?” उसका कॉल रिसीव करते ही आयुष्का ने घबराकर पूछा।

“अरे नहीं मैडम। अगर आपको लाइफ में कुछ करना है तो सबसे पहले ये नेगेटिविटी छोड़नी होगी। कहां आप कितने पढ़े लिखे हो और मैं अनपढ़ आपको ज्ञान दे रहा हूं। मैंने अपने ट्रेनिंग वाले सर जी से बात कर ली है। वो आपसे मिलना चाहते हैं। मैं आपको लोकेशन भेज देता हूं। अगर हो सके तो अभी आ जाओ। वो अभी खाली बैठे हैं।” फ्रैंकी ने जवाब दिया।

“ठीक है, मैं आती हूं।” कहकर आयुष्का ने कॉल कट कर दिया। जाने से पहले उसने अपना शेड्यूल चेक किया तो 3 घंटे बाद उसे अयान को एक सर्जरी में असिस्ट करना था।

आयु ने फ्रैंकी की भेजी हुई लोकेशन चेक की तो वो वहां से ज्यादा दूर नहीं थी। “3 घंटे तो काफी होते हैं। मैं 2 घंटे में आराम से वापिस आ सकती हूं।” आयु ने खुद से कहा।

आयु ने अपना बैग उठाया और डॉक्टर्स कोट वही उतार कर रख दिया। वो जल्दबाजी में बाहर की तरफ आ रही थी कि तभी अयान से टकरा गई।

अयान ने उसका भेजा एप्लीकेशन लेटर देख लिया था। वो उससे बात करने के लिए उसके केबिन में ही आ रहा था।

“सॉरी वो मेरा ध्यान नही था।” आयु ने टकराने को लेकर अयान से सॉरी कहा।

“हां वो तो दिख ही रहा है। कहीं जा रही हो? बहुत जल्दबाजी में लग रही हो।” अयान ने उसके चेहरे की हड़बड़ाहट को देखकर कहा।

“हां वो मुझे कुछ काम था। मैं तुम्हें आकर मिलती हूं। मुझे तुमसे कुछ बात भी करनी थी।” आयु को अगले 3 घंटे में वापस लौटना था इसलिए वो जल्द से जल्द वहां से निकलना चाहती थी।

वो वहां से जाने को हुई तभी अयान ने कहा, “मुझे पता है तुम्हें क्या बात करनी है। मैंने तुम्हारा एप्लीकेशन देख लिया है? क्या मैं इसका कारण जान सकता हूं?”

उसकी बात सुनकर आयु के कदम वहीं रुक गए। उसने धीमी आवाज में कहा, “तुम तो जानते हो इस साल मेरा एमडी का लास्ट ईयर है। हॉस्पिटल ज्वॉइन करने के चक्कर में ऐसे ही मैंने ठीक से क्लासेस नहीं ली है। मैं थोड़ा टाइम अपनी स्टडी और फैमिली को देना चाहती हूं। अनु के जाने के बाद से मॉम काफी लोनली फील करती है।”

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आयु ने जवाब पहले से ही सोच रहा था इसलिए उसने बिना हड़बड़ाहट के सब कुछ बता दिया। इससे अयान को भी उस पर शक नहीं हुआ।

“यही वजह है ना?” अयान ने क्लियर करने के लिए एक बार फिर पूछा।

जवाब में आयु ने हां में सिर हिला दिया। उसके हां कहते ही अयान ने कहा, “ठीक है मैं तुम्हारी ड्यूटी रीशेड्यूल कर दूंगा। फिर भी मुझे दिन में तुम्हारी जरूरत पड़ी तो तुम्हें आना होगा।”

“ठीक है आ जाऊंगी पर अभी मुझे जाना होगा। 3 घंटे बाद सर्जरी है तब तक मैं आ जाऊंगी। जाने में देर की तो आने में भी देर हो जाएगी।” आयु ने अयान को बाय कहा और फिर वहां से चली गई।

अयान वहां खड़ा उसे जाते हुए देख रहा था। उसने अपने मन में कहा, “किसी बहाने से ही सही तुम आगे बढ़ रही हो, ये देख कर मुझे अच्छा लग रहा है। थैंक गॉड तुमने अपने माइंड से वो बदला लेने जैसे सिली चीजों को निकाल दिया है।”

अयान वहां उसे वापस अपने केबिन में चला गया जबकि आयु बाहर आई तो उसने देखा मौसम काफी अच्छा था।

“यार इतने अच्छे मौसम में मैं गाड़ी में कैसे जा सकती हूं।” बोलते हुए उसने इधर उधर देखा तो पार्किंग एरिया में उसे एक स्कूटी दिखाई दी। “हां ये परफेक्ट रहेगी।” आयु ने स्कूटी की तरफ देख कर कहा।

वो सिक्योरिटी गार्ड के पास गई और उससे जाकर स्कूटी के बारे में पूछा।

“अरे ये तो यहां काम करने वाली नर्स की ही है मैडम। उन्होंने बोल रखा है कि जब भी किसी को जरूरत हो तो मैं उन्हें यूज करने के लिए दे सकता हूं। कई बार मैं भी यूज़ करता हूं। आपको चाहिए तो मैं आपको चाबी दे देता हूं, बस लौटते टाइम पेट्रोल भरवा दीजिएगा।” सिक्योरिटी गार्ड ने कहा और तुरंत उसकी चाबी लाकर आयु को दे दी।

स्कूटी पर बैठने से पहले आयु ने हेलमेट लगाया और उसे लेकर फ्रैंकी के बताए हुए रास्ते पर निकल गई। वो कुछ दूर पहुंची ही थी कि आगे जाकर वो ट्रैफिक जाम में फंस गई।

“उफ्फफ... बस इसी की कमी रह गई थी। अब ये जल्दी से क्लियर हो जाए वरना मैं सर्जरी के टाइम तक लौट नहीं पाऊंगी। क्या मुसीबत है यार...” बोलते हुए आयु ने इधर-उधर देखा।

उसके जस्ट पास में एक गाड़ी खड़ी थी। उस गाड़ी में कबीर और आरव थे। कबीर गाड़ी ड्राइविंग सीट पर था जबकि आरव उसके पास वाली सीट पर बैठा था। उन्हें भी किसी मीटिंग में पहुंचना था इसलिए ट्रैफिक में फंसने की वजह से आरव इरिटेट हो रहा था।

“मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि कोई भी मीटिंग रखनी हो तो हमारे ऑफिस में रखा करो। मुझे ट्रैफिक में स्टक बिल्कुल पसंद नहीं है। बेवजह का टाइम वेस्ट होता है और कुछ नहीं...” आरव इरिटेशन में कबीर पर चिल्ला रहा था।

“हां आपने कहा है लेकिन ऑफिस इस तरह की मीटिंग्स अजीब लगती है। ऑफिस लीगल कामों के लिए है। फिर इलीगल कामों की ऑफिस में मीटिंग करना सही नहीं लगता।” कबीर ने शांत लहजे में जवाब दिया।

“व्हाट डू यू मीन बाय इलीगल काम? मैं क्या तुम्हें कोई क्रिमिनल नजर आता हूं जो इलीगल काम करता है?” आरव ने उसकी तरफ घूर कर देखा।

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उसकी बात सुनकर कबीर ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिर जवाब में कहा, “हां आप तो नहीं करते... पर आप समझ सकते हो कि वो काम लूथराज से जुड़ा हुआ है इसलिए अपने आप ईलीगल हो जाता है। छवि सिंघानिया को बर्बाद करने के चक्कर में आप सही गलत कुछ भी नहीं सोच रहे हो... आप माहिरा लूथरा की हेल्प ले रहे हो, तो आगे से ये मत कहिएगा कि आप कोई इलीगल काम नहीं करते। छवि सिंघानिया के इलीगल कामों को बर्बाद करने के लिए आप इलीगली माहिरा लूथरा की मदद ले रहे हो।” कबीर ने अपने मन की सारी भड़ास निकाल दी। उसने जानबूझकर एक से ज्यादा बार ईलीगल शब्द का यूज किया और बार-बार उस शब्द पर जोर दिया।

“तुम कुछ ज्यादा ही नहीं बोल रहे हो आजकल? ये सब दादी की संगत का असर है।” आरव ने आंखें घुमा कर कहा।

“दादी और आप की संगत का असर है। दिल में जो भी होता है वो बोल देता हूं। कभी आपने सोचा है कि दादी को इसके बारे में पता चला तो उनकी हेल्थ पर क्या असर पड़ेगा? उनके ब्रेन...” बोलते हुए कबीर रुक गया। उसने देखा आरव उसकी तरफ गुस्से में देख रहा था तो उसने अपने मुंह पर अंगुली लगा ली।

“इट्स बेटर नाउ...” आरव ने जवाब दिया। फिर कुछ पल‌ उसने ट्रैफिक की तरफ देखा जो अभी भी ज्यों का त्यों बना हुआ था। “इसका कुछ करवाओ... मेरा दम घुट रहा है।” आरव ने अपनी शर्ट के ऊपर का बटन खोला और सांस लेने के लिए कार की विंडो ओपन कर ली। वो गहरी सांसे ले रहा था।

“आप चाहो तो खुली हवा में जा सकते हो।” उसका दम घुटते देख कबीर ने कहा। “ट्रैफिक क्लियर होते ही मैं आपको कॉल कर दूंगा।”

“नहीं, मैं ठीक हूं।” आरव ने जवाब दिया। उसने अपना मुंह विंडो के बिल्कुल पास कर लिया ताकि सांस ले सके। जब उसे थोड़ा बैटर लगने लगा, वो सही होकर बैठ गया लेकिन कार की विंडो अभी भी ओपन थी।

“यार इससे अच्छा तो मैं पैदल दौड़ कर चली जाती। अगर ये ट्रैफिक ऐसे ही रहा तो मुझे वापस हॉस्पिटल जाना होगा।” बड़बड़ाते हुए आयुष्का ने इधर-उधर देखा तो उसके पास वाली कार में उसे आरव दिखाई दिया। “अच्छा तो दुश्मन भी यही पास में ही है। ये अच्छा मौका है इसकी जान लेने का...” आयु ने उसकी तरफ देख कर सोचा।

उसने देखा आरव का ध्यान बातें करने में था। आयुष्का ने एक नजर उसके गाड़ी को गौर से देखा और फिर कहा, “गाड़ी तो काफी लक्जीरियस लग रही है और महंगी भी... मैंने पढ़ा था इसके इंटरव्यू में, इसे लक्जीरियस गाड़ियों का शौक है। चलो बदला लेने की शुरुआत कर ली जाए...”

आयु के चेहरे पर हल्की स्माइल थी। उसने अपने पैर की तरफ देखा तो उसने पेंसिल हील पहन रखी थी। उसने अपने एक पैर की हील निकाली और उसे अपने हाथ में लिया। वो गाड़ी के पास आकर अपनी हील से गाड़ी के खुरचने लगी, जिससे उस पर निशान बन गया।

“वेरी गुड..! अभी तो तुम्हारी गाड़ी पर निशान दिया है। आगे आगे देखो क्या होता है। मैं तुम्हारी जिंदगी पर भी ग्रहण लगा दूंगी।” आयुष्का हाथ में हील लिए मुस्कुराते हुए गाड़ी की तरफ देख रही थी तभी आरव की नजर उस पर गई थी।

“हे? क्या कर रही हो तुम?” आरव ने उसकी तरफ हैरानी से देखा। वो गाड़ी से बाहर निकलने लगा तभी आयु जल्दी से वापस स्कूटी पर बैठ गई।

ट्रैफिक ज्यादा होने की वजह से वो गाड़ी का दरवाजा नहीं खोल पा रहा था लेकिन उसने खिड़की से झांक कर देखा तो उसकी गाड़ी पर एक बड़ा सा निशान बना हुआ था। आयु ने उसकी तरफ थम्स डाउन का इशारा किया।

“छोडूंगा नहीं मैं तुम्हें... इस गाड़ी के पैसे तो तुम ही भरोगी।” आरव गुस्से में आयु को बुरी तरह घूर रहा था, वही कबीर को कुछ समझ नहीं आया।

उसे आगे कुछ कहने या करने का मौका नहीं मिला और ट्रैफिक क्लियर होने लगा। आयु ने जल्दी से अपनी स्कूटी वहां से दौड़ा ली। पीछे से आरव ने स्कूटी के नंबर प्लेट की फोटो क्लिक कर ली थी।

“पता लगाओ ये लड़की कौन है? मुझे ये अपने पास चाहिए।” आरव ने कबीर की तरफ गुस्से में देखा और कहा।

कबीर ने उसकी बात पर हामी भरी और उस पिक्चर को किसी को सेंड कर दिया। आयु अपनी तरफ से आरव को उसका पहला जख्म देकर वहां से निकल चुकी थी जबकि उसकी इस छोटी सी हरकत से वो बहुत ज्यादा गुस्से में था।

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